मधुसूदन शर्मा राजसमंद. वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ठीक पहले स्कूलों को बजट जारी होने से अब उसे तय समय सीमा में खर्च करने की चुनौती खड़ी हो गई है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा जारी राशि को हर हाल में 31 मार्च तक खर्च करना अनिवार्य होगा, अन्यथा यह बजट लेप्स हो जाएगा। परिषद […]
मधुसूदन शर्मा
राजसमंद. वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ठीक पहले स्कूलों को बजट जारी होने से अब उसे तय समय सीमा में खर्च करने की चुनौती खड़ी हो गई है। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद द्वारा जारी राशि को हर हाल में 31 मार्च तक खर्च करना अनिवार्य होगा, अन्यथा यह बजट लेप्स हो जाएगा। परिषद ने सत्र 2025-26 के तहत राज्यभर के सरकारी स्कूलों के लिए कम्पोजिट स्कूल ग्रांट जारी की है। इसके तहतप्रारंभिक शिक्षा के 50 हजार 318 स्कूलों के लिए 118.43 करोड़ और माध्यमिक शिक्षा के 18 हजार 799 स्कूलों के लिए 11302.300 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। राजसमंद जिले को भी इस मद में राशि मिली है। इसमें प्रारंभिक शिक्षा के 1277 स्कूलों को 319.35 लाख और माध्यमिक शिक्षा के 350 स्कूलों को 214.1000 लाख रुपए जारी किए गए हैं।
स्कूलों को यह राशि विभिन्न आवश्यक कार्यों में उपयोग करनी होगी, जिनमें शामिल हैं- दरी-पट्टी, बिजली बिल, पेयजल व्यवस्था, स्टेशनरी, चॉक-डस्टर, खेल सामग्री, प्रयोगशाला रखरखाव और इंटरनेट सेवाएं। इसके अलावा भवन की मामूली मरम्मत, अग्निशमन यंत्रों में गैस भरवाना, बीमार छात्रों को अस्पताल ले जाने का किराया जैसे कार्यों पर भी यह राशि खर्च की जा सकेगी।
परिषद ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कुल ग्रांट का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा स्वच्छता एक्शन प्लान पर खर्च करना होगा। इसमें शौचालय सफाई,फिनाइल, टॉयलेट क्लीनर, साबुन, सैनिटाइजर, कचरा पात्र आदि शामिल होंगे। इसके अलावा बालिकाओं के लिए डिस्पेंसर और इन्सीनरेटर के रखरखाव को भी प्राथमिकता दी गई है।
स्पष्ट किया गया है कि इस राशि का उपयोग फर्नीचर,जलपान, उत्सव आयोजन, फोटोग्राफी जैसे कार्यों में नहीं किया जा सकेगा। यदि कहीं दुरुपयोग पाया गया तो संस्था प्रधान के खिलाफ कार्रवाई कर राशि की वसूली की जाएगी।
यह राशि शिक्षा सत्र की शुरुआत (जुलाई) में ही जारी की जानी चाहिए, ताकि स्कूल समय पर आवश्यक सामग्री खरीद सकें और संचालन में कोई बाधा न आए।
मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा, राजस्थान