
Board Exam News
मधुसूदन शर्मा
राजसमंद. एक दौर था जब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा पास करना ही बड़ी उपलब्धि माना जाता था। आज तस्वीर बिल्कुल उलट दिख रही है—नतीजों में लगातार सुधार और छात्रों के “छप्परफाड़” अंक हर किसी को हैरान कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा के दौर में जहां शिक्षकों की शिकायत रहती है कि बच्चे पढ़ाई में कम रुचि लेते हैं, वहीं बोर्ड परीक्षा में रिकॉर्ड अंक कई सवाल खड़े कर रहे हैं-क्या प्रश्नपत्र आसान हो गए हैं या मूल्यांकन प्रणाली में ढील आई है?
बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पाँच वर्षों में परिणामों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज हुआ है:
यह बदलाव संकेत देता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब उच्च श्रेणी में पास हो रहे हैं।
| वर्ष | प्रविष्ट विद्यार्थी | कुल उत्तीर्ण | उत्तीर्ण प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| 2026 | 10,49,068 | 9,88,520 | 94.23% |
| 2025 | 10,71,460 | 10,02,842 | 93.60% |
| 2024 | 10,39,895 | 9,67,392 | 93.03% |
| 2023 | 10,41,373 | 9,42,360 | 90.49% |
| 2022 | 10,59,072 | 8,77,848 | 82.89% |
विशेषज्ञों के अनुसार:
यही कारण माना जा रहा है कि छात्रों के अंक असामान्य रूप से अधिक आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार स्कूल की स्थानीय परीक्षाओं में छात्रों के अंक बोर्ड से कम देखे जाते हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रणाली इससे अलग मानी जाती है:
इससे त्रुटि की संभावना बेहद कम रहती है।
बोर्ड में सत्रांक/प्रायोगिक में अक्सर 20 में 20 अंक दिए जाते हैं। लिखित परीक्षा में केवल 13 अंक लाकर भी छात्र पास हो सकता है। इस व्यवस्था से कुल परिणाम प्रतिशत बढ़ने में मदद मिलती है।
एक समय राजस्थान बोर्ड को देश के कठिनतम बोर्डों में गिना जाता था। आज अभिभावकों का झुकाव सीबीएसई की ओर बढ़ रहा है। निजी स्कूल भी सीबीएसई से संबद्धता के लिए आवेदन कर रहे हैं।
हिंदी और अंग्रेजी जैसे भाषा विषयों में 100 में 100 अंक मिलना भी बहस का विषय बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भाषा में पूर्णता संभव नहीं, ऐसे में पूर्ण अंक देना मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
Published on:
29 Mar 2026 10:36 am
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