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छप्पर फाड़ नंबर या बदलती व्यवस्था: राजस्थान बोर्ड के परिणामों ने खड़े किए सवाल

मधुसूदन शर्मा राजसमंद. एक दौर था जब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा पास करना ही बड़ी उपलब्धि माना जाता था। आज तस्वीर बिल्कुल उलट दिख रही है—नतीजों में लगातार सुधार और छात्रों के “छप्परफाड़” अंक हर किसी को हैरान कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा के दौर में जहां शिक्षकों की शिकायत रहती है कि […]

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Board Exam News

Board Exam News

मधुसूदन शर्मा

राजसमंद. एक दौर था जब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा पास करना ही बड़ी उपलब्धि माना जाता था। आज तस्वीर बिल्कुल उलट दिख रही है—नतीजों में लगातार सुधार और छात्रों के “छप्परफाड़” अंक हर किसी को हैरान कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा के दौर में जहां शिक्षकों की शिकायत रहती है कि बच्चे पढ़ाई में कम रुचि लेते हैं, वहीं बोर्ड परीक्षा में रिकॉर्ड अंक कई सवाल खड़े कर रहे हैं-क्या प्रश्नपत्र आसान हो गए हैं या मूल्यांकन प्रणाली में ढील आई है?

पाँच वर्षों में परिणाम का ट्रेंड: लगातार बढ़त

बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले पाँच वर्षों में परिणामों में उल्लेखनीय उछाल दर्ज हुआ है:

  • कुल उत्तीर्ण प्रतिशत: 82.89 प्रतिशत (2022) से बढ़कर 94.23 प्रतिशत (2026)
  • कुल वृद्धि: 11.34 प्रतिशत
  • प्रथम श्रेणी: 33.87 प्रतिशतसे बढ़कर 52.97 प्रतिशत (वृद्धि:19.10प्रतिशत)
  • तृतीय श्रेणी: 14.40 से घटकर 6.86 प्रतिशत (कमी:7.54प्रतिशत)

यह बदलाव संकेत देता है कि बड़ी संख्या में विद्यार्थी अब उच्च श्रेणी में पास हो रहे हैं।

कक्षा 10 – वर्षवार परिणाम आंकड़े

वर्षप्रविष्ट विद्यार्थीकुल उत्तीर्णउत्तीर्ण प्रतिशत
202610,49,0689,88,52094.23%
202510,71,46010,02,84293.60%
202410,39,8959,67,39293.03%
202310,41,3739,42,36090.49%
202210,59,0728,77,84882.89%

श्रेणीवार स्थिति

प्रथम श्रेणी

  • 2026: 5,55,663 (52.97प्रतिशत)
  • 2022: 3,58,720 (33.87प्रतिशत)

द्वितीय श्रेणी

  • 2026: 3,60,656 (34.38प्रतिशत)
  • 2022: 3,66,285 (34.59प्रतिशत)

तृतीय श्रेणी

  • 2026: 72,029 (6.86प्रतिशत)
  • 2022: 1,52,556 (14.40प्रतिशत)

सवालों के घेरे में प्रश्नपत्र और मूल्यांकन

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • प्रश्नपत्र सीधे पाठ्यपुस्तक आधारित और अपेक्षाकृत सरल होते हैं
  • एक परीक्षक को 350–400 कॉपियां घर पर जांच के लिए दी जाती हैं
  • मूल्यांकन में प्रभावी सुपरविजन का अभाव

यही कारण माना जा रहा है कि छात्रों के अंक असामान्य रूप से अधिक आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार स्कूल की स्थानीय परीक्षाओं में छात्रों के अंक बोर्ड से कम देखे जाते हैं।

सीबीएसई बनाम आरबीएसई:बड़ा अंतर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की प्रणाली इससे अलग मानी जाती है:

  • प्रश्नपत्र का स्तर अपेक्षाकृत कठिन
  • लगभग 50% प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं पर आधारित
  • एक दिन में केवल 20 कॉपियों का मूल्यांकन
  • तीन-स्तरीय जांच: परीक्षक, अतिरिक्त मुख्य परीक्षक, मुख्य परीक्षक
  • पूर्ण अंक वाली कॉपियों की दोबारा गहन जांच

इससे त्रुटि की संभावना बेहद कम रहती है।

सत्रांक का असर: कम अंक में भी पास

बोर्ड में सत्रांक/प्रायोगिक में अक्सर 20 में 20 अंक दिए जाते हैं। लिखित परीक्षा में केवल 13 अंक लाकर भी छात्र पास हो सकता है। इस व्यवस्था से कुल परिणाम प्रतिशत बढ़ने में मदद मिलती है।

बदलती धारणा: घटती प्रतिष्ठा

एक समय राजस्थान बोर्ड को देश के कठिनतम बोर्डों में गिना जाता था। आज अभिभावकों का झुकाव सीबीएसई की ओर बढ़ रहा है। निजी स्कूल भी सीबीएसई से संबद्धता के लिए आवेदन कर रहे हैं।

भाषा विषय में 100/100 भी चर्चा में

हिंदी और अंग्रेजी जैसे भाषा विषयों में 100 में 100 अंक मिलना भी बहस का विषय बन गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भाषा में पूर्णता संभव नहीं, ऐसे में पूर्ण अंक देना मूल्यांकन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।