राजसमंद. शहर के धोइंदा में प्रस्तावित बहुद्देश्यीय पशु चिकित्सालय अब विकास की कहानी कम और राजनीति का अखाड़ा ज्यादा बन गया है। कागजों में दौड़ती इस योजना की जमीन आज भी अतिक्रमण में जकड़ी है, जबकि इसको लेकर सियासी खेल जारी है। कांग्रेस शासनकाल में इस चिकित्सालय को स्वीकृति मिली, लेकिन 2021 में इसे नाथद्वारा […]
राजसमंद. शहर के धोइंदा में प्रस्तावित बहुद्देश्यीय पशु चिकित्सालय अब विकास की कहानी कम और राजनीति का अखाड़ा ज्यादा बन गया है। कागजों में दौड़ती इस योजना की जमीन आज भी अतिक्रमण में जकड़ी है, जबकि इसको लेकर सियासी खेल जारी है। कांग्रेस शासनकाल में इस चिकित्सालय को स्वीकृति मिली, लेकिन 2021 में इसे नाथद्वारा स्थानांतरित करने के फैसले ने विवाद को जन्म दे दिया।
उस समय भाजपा ने सड़क से सदन तक कांग्रेस के इस फैसले का विरोध किया, बाजार बंद करवाए और आमजन के साथ विरोध भी दर्ज कराया। लेकिन कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भाजपा का विरोध काम नहीं आ सका। प्रदेश में जब भाजपा की सरकार बनी तो इस चिकित्सालय को राजसमंद में खुलवाने की घोषणा की गई। जमीन का आवंटन भी किया गया। इसके बाद सरकार ने पूरे मामले पर चुप्पी साध ली। परिणाम ये निकला की आवंटित जमीन पर कब्जे हो गए और अब इन कब्जों को हटाने में कोई भी रूचि नहीं दिखा रहे हैं। लोगों में ये चर्चा है कि कथित अपने हित साधने के चक्कर में इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में भाजपा सरकार भी इसको लेकर पूरी तरह से मौन है।
धोइंदा में 4.15 बीघा जमीन इस परियोजना के लिए चिन्हित की गई थी, लेकिन हालात यह हैं कि इस पर लगातार अतिक्रमण होता रहा। प्रशासन ने एक-दो बार कार्रवाई की, पर कब्जे फिर लौट आए। दिसंबर 2023 में 2.50 लाख रुपए तारबंदी के लिए स्वीकृत हुए, लेकिन न तार लगी, न अतिक्रमण हटा और योजना फिर फाइलों में सिमट गई।
बजट स्वीकृत होने के बावजूद काम नहीं होना प्रशासनिक सुस्ती या राजनीतिक उदासीनता यह अब चर्चा का विषय बन चुका है। आमजन में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं राजनीतिक समीकरणों के चलते कार्रवाई से परहेज तो नहीं किया जा रहा।
2021 में जब तत्कालीन सरकार ने अतिक्रमण का हवाला देकर चिकित्सालय को नाथद्वारा शिफ्ट किया, तब विरोध हुआ। अब वही अतिक्रमण आज भी जस का तस है, लेकिन समाधान की दिशा में ठोस कदम नजर नहीं आ रहे।
2019 में जमीन मिली, 2023 में बजट आया, 2025 में 3.76 करोड़ का प्रस्ताव बना—लेकिन 2026 में भी हालात नहीं बदले। ऐसे में क्षेत्र की जनता और किसान और पशुपालक इस चिकित्सालय की बाट जो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदारों पर भी कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।
बहुद्देश्यीय पशु चिकित्सालय को लेकर प्रस्ताव भिजवाएं जा चुके हैं। पहले चार करोड़ का प्रस्ताव भिजवाया। बाद में प्रस्ताव संशोधित कर दो करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर सरकार के पास भेजा हुआ है।वित्त विभाग से स्वीकृत होने के बाद इसका काम शुरू किया जाएगा।
शक्तिसिंह, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, राजसमंद