जिले में सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। उदयपुर-जयपुर हाईवे किनारे प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर, जो पिछले करीब तीन दशकों से फाइलों में कैद था
राजसमंद. जिले में सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था का सपना अब साकार होने की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। उदयपुर-जयपुर हाईवे किनारे प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर, जो पिछले करीब तीन दशकों से फाइलों में कैद था, अब जमीन पर उतरने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। करीब 32 वर्ष पहले (1994-95) टाउनशिप योजना के तहत शहर के बाहरी क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर के लिए भूमि आवंटित की गई थी। उद्देश्य था शहर में बिखरी ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को एक ही स्थान पर व्यवस्थित करना। लेकिन कानूनी पेच और तकनीकी अड़चनों के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
प्रारंभिक चरण में दो खसरों में भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन एक खसरा नदी-नाला श्रेणी का होने के कारण योजना अटक गई। बाद में नगर परिषद ने दूसरे खसरे में जमीन का ऑक्शन किया, जिसमें 13 हितधारकों ने राशि जमा करवाई। अब एक बार फिर उम्मीद जगी है कि यह परियोजना गति पकड़ेगी। नगर परिषद इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए करीब 40 बीघा भूमि की तलाश में जुटी है।
संभावित स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है और पर्याप्त भूमि नहीं मिलने पर राज्य सरकार से आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। फिलहाल डीटीओ कार्यालय के पास हाईवे किनारे काम शुरू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए नगर परिषद ने 13 दुकानों का लॉटरी के माध्यम से आवंटन करने का निर्णय लिया है। इससे ट्रांसपोर्ट नगर की शुरुआत छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन तय मानी जा रही है।
तरुण बाहेती, अधिशासी अभियंता, नगर परिषद ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन 13 हितधारकों ने पहले राशि जमा करवाई थी, उन्हें आवंटन किया जाएगा, जिससे छोटे स्तर पर शुरुआत हो सके।
गिरिराज पालीवाल, मंत्री, ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने बताया कि राजसमंद में ट्रांसपोर्ट नगर की लंबे समय से जरूरत है। वर्तमान में वाहन सर्विस रोड पर खड़े रहते हैं, जिससे आमजन को परेशानी होती है। भूमि का आवंटन ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को ही किया जाना चाहिए।