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गर्मी की मार: कुंभलगढ़ में थमी पर्यटन की रफ्तार, एक हफ्ते में पर्यटकों की संख्या घटी

विश्व विरासत सूची में शामिल ऐतिहासिक कुंभलगढ़ दुर्ग में इन दिनों पर्यटन की रफ्तार थमती नजर आ रही है। पिछले एक सप्ताह में पर्यटकों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है

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Kumbhalgarh Fort News

Kumbhalgarh Fort News

राजसमंद. विश्व विरासत सूची में शामिल ऐतिहासिक कुंभलगढ़ दुर्ग में इन दिनों पर्यटन की रफ्तार थमती नजर आ रही है। पिछले एक सप्ताह में पर्यटकों की संख्या में अचानक भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे पूरे पर्यटन क्षेत्र की रौनक फीकी पड़ गई है। कुछ दिन पहले तक जहां दुर्ग परिसर और आसपास की सड़कों पर दिनभर पर्यटकों की चहल-पहल रहती थी, वहीं अब दिन के समय सन्नाटा पसरा हुआ दिखाई देता है। हालांकि सुबह और शाम के समय हल्की आवाजाही जरूर बनी हुई है। दुर्ग स्थित टिकट खिड़की से मिली जानकारी के अनुसार, एक सप्ताह पहले तक प्रतिदिन एक हजार से अधिक पर्यटक यहां पहुंच रहे थे, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 300 से 400 रह गई है। इस गिरावट का सीधा असर स्थानीय पर्यटन व्यवसाय पर पड़ा है।

होटल व्यवसायियों का कहना है कि भीषण गर्मी के चलते पर्यटक इन दिनों यात्रा से बच रहे हैं, जिससे होटलों की बुकिंग में लगातार कमी आई है। इसके साथ ही विवाह सीजन का प्रभाव भी देखने को मिल रहा है, जिससे लोगों का रुझान पर्यटन की बजाय सामाजिक आयोजनों की ओर अधिक हो गया है। पर्यटकों की कमी का असर जंगल सफारी, जिप्सी संचालन और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों पर भी साफ दिखाई दे रहा है।

कुंभलगढ़: इतिहास और पहचान

राजसमंद जिले में स्थित कुंभलगढ़ दुर्ग का निर्माण 15वीं शताब्दी में मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुम्भा ने करवाया था। यह दुर्ग अपनी विशाल परकोटा दीवार के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसे “भारत की महान दीवार” भी कहा जाता है। करीब 36 किलोमीटर लंबी यह दीवार चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है। यह दुर्ग महान योद्धा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली भी है और 2013 में यूनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। स्थानीय व्यवसायियों को उम्मीद है कि मौसम में बदलाव और पर्यटन सीजन की वापसी के साथ कुंभलगढ़ में फिर से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और क्षेत्र की रौनक लौटेगी।