
कुंवारिया. कालीमगरी क्षेत्र में प्यास बुझाने के लिए खेतों में बने फार्म पोण्ड में उतरे दो पैंथर के शावकों की पानी में डूबने से मृत्यु हो गई। शावकों की मंौत पर उनकी मां के आक्रामक होने की आशंका के चलते वन विभाग ने काली मगरी क्षेत्र में पिंजरा लगवाया है। कालीमगरी क्षेत्र में स्थित रतनसिंह के खेत में बने फार्म पोण्ड में शुक्रवार को दो शावकों के गिरे होने की सूचना पर सहायक वन अधिकारी रामपाल, रंगलाल, लच्छीराम गाडरी, गार्ड तुलसीराम, पशुरक्षक सुरेन्द्रसिंह आदि कर्मचारियों के दल ने मौके पर पहुंचकर देखा तो पोण्ड में पानी में तैरते दोनों शावक पैंथर के पाए गए। वनकर्मियों ने मौके पर जांच के बाद बताया कि कृषि के लिए बने फार्म पोण्ड में सम्भवत: प्यास बुझाने के लिए दोनों शावक पहुंचे, जिनके पोण्ड में गिरने से डूबने के कारण मौत हो गई। बताया कि काली मगरी के आसपास में पीने का पानी कहीं पर भी नहीं होने से ही दोनों शावक गहरे पोण्ड में अपनी प्यास बुझाने के लिए उतरे होंगे। बताया कि कार्रवाई के दौरान शावकों की मां की हलचल भी आसपास ही थी, जिससे अत्यधिक सावधानी से दोनों मृत शावकों को पोण्ड से बाहर निकाला गया। पोण्ड में करीब दस फीट पानी भरा हुआ था। पोण्ड के किनारों पर भी पैंथर के नाखून के निशान बने हुए थे। ऐसे में यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों शावकों ने पानी से बाहर निकलने का प्रयास किया पर सफल नहीं हो पाए। दोनों शावकों में एक नर व एक मादा शावक था, जिनकी उम्र करीब एक वर्ष बताई गई। वनकर्मियों ने दोनों शावकों को पीपरड़ा स्थित वन विभाग की चौकी पर ले जाकर पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम कराया। इधर, शावकों की मां के समीप की पहाड़ी पर होने व लगातार गुर्राने से उपस्थित वनकर्मी व ग्रामीण भी सहम गए। शनिवार को भी पैंथर शावक की मां के पोण्ड के समीप में ही बैठे होने की सूचना पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पिंजरा लगवाया है।
नहर का पानी मांगा, किसानों का कलक्टर को ज्ञापन
कुंवारिया. भावा ग्राम पंचायत क्षेत्र के किसानों ने फोरलेन पर स्थित नहर की वितरिका पर उपस्थित होकर नहर का पानी छोडऩे की मांग की। किसानों का आरोप है कि नहर का पानी निर्धारित समय पर नहीं छोडऩे से फसलें बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई है। किसानो ने सामुहिक रूप से जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर शीघ्र नहर में पानी छोडऩे की मांग की है। इस दौरान भावा सरपंच प्रहलाद सिंह चारण, पूर्व सरपंच गोविन्दसिंह चारण, उपसरपंच जगदीश गुर्जर, तुलसीराम सालवी, भगवानलाल कुमावत, प्रकाश बंजारा, हरलाल बंजारा मौजूद थे।