
राजसमंद. सांगावास में चंबल परियोजना प्रोजेक्ट के तहत कार्य करते श्रमिक (Photo-Patrika)
राजसमंद. गर्मी आते ही पानी की चिंता, खाली बर्तनों के साथ लंबा इंतजार, टैंकरों के भरोसे जिंदगी और मवेशियों की प्यास बुझाने की जद्दोजहद… भीम-देवगढ़ के हजारों परिवारों की यह तस्वीर अब बदलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इसके लिए अभी एक साल और इंतजार करना होगा। दशकों से पेयजल संकट से जूझ रहे इस पहाड़ी अंचल तक चंबल का पानी पहुंचाने वाली 1042 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना अब दिसंबर 2027 तक पूरी होने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। यानी जिस पानी का इंतजार क्षेत्र के लोग लंबे समय से कर रहे हैं, उसके लिए उन्हें एक और गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
यह परियोजना पूरी होने के बाद भीम-देवगढ़ की 197 मुख्य गांवों और 668 ढाणियों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का रास्ता तैयार होगा। योजना के दायरे में भीम के 95 मुख्य गांव और 499 ढाणियां तथा देवगढ़ के 102 मुख्य गांव और 169 ढाणियां शामिल है। परियोजना से जुड़े 33 हजार परिवारों को पेयजल कनेक्शन मिलने का उल्लेख भी विभागीय विवरण में किया गया है। हालांकि, परियोजना की शुरुआत से लेकर अब तक की समयसीमा पर नजर डालें तो निर्माण की रफ्तार और बार-बार बढ़ती अवधि कई सवाल भी खड़े करती है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में घोषित चंबल पेयजल परियोजना से क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि वर्षों पुरानी पानी की समस्या का समाधान जल्द हो जाएगा। लेकिन निर्माण की धीमी गति के कारण निर्धारित समय पर पानी नहीं पहुंच पाया। पहली समय सीमा 15 जून 2025 तय की गई थी। इसके बाद संभावित पूर्णता तिथि 30 जून 2026 रखी गई, लेकिन यह समयसीमा भी निकल गई। अब विभाग दिसंबर 2027 तक काम पूरा करने का दावा कर रहा है। ऐसे में भीम-देवगढ़ की जनता के लिए अब तारीख से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि चंबल का पानी वास्तव में उनके घरों तक कब पहुंचेगा।
1042 करोड़ रुपये से अधिक की इस परियोजना में अब तक कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्य किए जा चुके है, लेकिन अभी लंबा काम बाकी है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने का काम करीब 50 प्रतिशत पूरा हुआ है। पानी के भंडारण के लिए 54 उच्च जलाशयों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। वहीं, 16 पंपिंग स्टेशन भी करीब-करीब तैयार किए जा चुके है। इसके अलावा 16 सीडब्ल्यूआर (क्लियर वाटर रिजर्वायर) तैयार किए जा रहे है। इनमें कुछ का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि बाकी पर काम जारी है। डासरिया क्षेत्र में बूस्टर पंप स्थापित किया जाएगा, जिससे परियोजना के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने में मदद मिलेगी। पंप हाउस, भूमिगत सीडब्ल्यूआर और उच्च जलाशयों का निर्माण भी अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न चरणों में चल रहा है। इन सभी ढांचों के तैयार होने और पाइपलाइन नेटवर्क पूरा होने के बाद ही गांवों तथा दूरस्थ ढाणियों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था पूरी हो सकेगी।
भीम-देवगढ़ में चंबल परियोजना को लेकर लोगों की उम्मीदें लगातार बनी हुई है। हर साल गर्मियों में पानी की किल्लत, टैंकरों पर निर्भरता और पशुओं के लिए पानी जुटाने की समस्या ग्रामीण जीवन को प्रभावित करती रही हैं। ऐसे में यह परियोजना क्षेत्र के लिए केवल एक विकास कार्य नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सबसे बड़ी जरूरत से जुड़ी योजना है। अब तक 54 उच्च जलाशयों का तैयार होना और पंपिंग स्टेशनों सहित अन्य निर्माण कार्यों का आगे बढ़ना उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन करीब 50 प्रतिशत पाइपलाइन का काम पूरा होना बताता है कि अभी चुनौती कम नहीं है।
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लाभ केवल मुख्य गांवों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दूर-दराज की ढाणियों को भी पेयजल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। भीम क्षेत्र के 95 मुख्य गांवों और 499 ढाणियों को परियोजना में शामिल किया गया है। इसी तरह देवगढ़ क्षेत्र के 102 मुख्य गांवों और 169 ढाणियों तक चंबल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। इस प्रकार कुल 197 मुख्य गांवों और 668 ढाणियों को परियोजना से लाभान्वित किया जाएगा। योजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति का स्थायी आधार तैयार होने की उम्मीद है। खासकर उन ग्रामीण परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है, जिन्हें गर्मियों में पानी की व्यवस्था के लिए दूर तक जाना पड़ता है या टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है।
परियोजना में देरी की वजह केवल निर्माण की धीमी गति नहीं, बल्कि पहाड़ी भौगोलिक परिस्थितियां और तकनीकी-प्रशासनिक अड़चनें भी रही हैं। चंबल परियोजना मांडल के अधिशासी अभियंता धर्मेन्द्र के अनुसार, भीम-देवगढ़ क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण यहां निर्माण कार्य में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शुरुआती दौर में कई तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं भी सामने आईं। कुछ ठेकेदारों की धीमी कार्यशैली के चलते भी काम प्रभावित हुआ। हालांकि, अब विभाग की ओर से परियोजना की लगातार उच्चस्तरीय मॉनिटरिंग की जा रही है। सभी तकनीकी क्लीयरेंस की बाधाएं दूर कर ली गई हैं और ठेकेदारों के कामकाज पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। काम में देरी के लिए ठेकेदारों की क्षतिपूर्ति राशि भी रोक दी गई है। विभाग का दावा है कि अब निर्माण कार्य में तेजी लाई जा रही है और दिसंबर 2027 तक परियोजना को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
Updated on:
3 Nov 2026, 4:02 PM IST
Published on:
3 Nov 2026, 4:01 PM IST
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