राजसमंद

कहने को राष्ट्रीय राजमार्ग, हालात ग्रामीण सड़क से भी बदहाल

जर्जर एनएच 162 ए पर भी वाहन चालकों से हो रही टोल वसूली
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कहने को राष्ट्रीय राजमार्ग, हालात ग्रामीण सड़क से भी बदहाल

खस्ताहाल सड़क दुर्घटनाओं को भी दे रही बढ़ावा
रेलमगरा. भीलवाड़ा से उदयपुर एवं चित्तौडग़ढ़ से उदयपुर मार्ग पर बने स्टेट हाइवे के मध्य भाग को जोडऩे के लिए बनाए गए राष्ट्रीय राजमार्ग 162 ए पिछले लम्बे समय से काफी जर्जर हाल पड़ा है। इसके चलते वाहन चालकों को और क्षेत्र के ग्रामीणों को आवागमन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अत्यधिक व्यस्त रहने वाले इस मार्ग पर औद्योगिक क्षेत्र भी होने से काफी संख्या में भारी वाहन भी गुजरते हैं। इसके बावजूद इस सड़क के निर्माण के बाद सार-संभाल के लिए नेशनल हाइवे विभाग के अधिकारियों ने कभी भी कोई प्रयास नहीं किए। यही कारण है कि वर्तमान में इस सड़क पर डामर बेहद कम जगह ही बचा है और अधिकांश जगह पर गड्ढे ही दिखाई देते हैं। दोनों स्टेट हाइवे को मध्य से जोडऩे वाली इस सड़क पर हिन्दुस्तान जिंक की दरीबा एवं सिन्देसर खुर्द माइंस होने से भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है। यही कारण है कि सड़क काफी क्षतिग्रस्त होने के साथ ही किनारों की पटरियां पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में इस जर्जरहाल सड़क से गुजरने वाले वाहनों से उडऩे वाली मिट्टी आमजन और दुपहिया वाहन चालकों के लिए मुसीबत बनी हुई है। दुपहिया वाहन चालकों को मार्ग पर पड़े गड्ढ़ों के कारण दिक्कत तो रहती ही है, वहीं हादसे का भी डर बना रहता है।
-बढ़ रही दुर्घटनाओं की संख्या
खस्ताहाल सड़क के चलते इस मार्ग पर दुर्घटनाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में एक माह में बमुश्किल इक्का-दुक्का हादसे के मामले ही स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज होते थे वहीं वर्ष 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 15 तक पहुंच गई। इसके बाद 2018 में भी इसमें बढ़ोतरी हुई और 17 हादसे हो चुके हैं। यह संख्या तो सिर्फ दर्ज मामलों की है, जबकि इनके अतिरिक्त कई हादसे ऐसे भी हैं, जिनको लेकर पुलिस में मामले भी दर्ज नहीं हुए हैं। ऐसे में पुलिस सूत्रों के अनुसार वाहनों को गड्ढों से बचाने के लिए चालक वाहनों को कभी दाएं तो कभी बाएं से गुजारते हैं, जिससे में पीछे से अथवा सामने से आने वाले वाहन चालक भ्रमित होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं।
नहीं हुआ पेचवर्क
राष्ट्रीय राजमार्ग बनने के बाद इस सड़क का रखरखाव करने के नाम पर नेशनल हाइवे अब तक महज खानापूर्ति ही करता रहा है। लंबे समय से जर्जरहाल पड़ी इस सड़क पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं के बाद भी विभाग ने सबक नहीं लिया और सड़क पर पेचवर्क तक नहीं कराया गया। इसका पुन: सर्वे करा इसे नॉन पेचेबल सड़क में शामिल किया गया, लेकिन नवीन सड़क स्वीकृत कराने में तीन वर्ष गुजर गए।
टोल वसूली पर बहस आम बात
सड़क पूरी तरह से जर्जरहाल हो चुकी है, जिसके बाद भी यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों से टोल वसूली तक बंद नहीं की गई। दरीबा के निकट एवं धनेरियागढ़ व सनवाड़ के मध्य दो टोल नाके स्थापित कर रखे हैं। बड़ी मुश्किलों का सामना कर आगे बढऩे वाले वाहन चालक सामने टोल नाका देखकर टोल कर्मियों से उलझ जाते हैं। वे टोल वसूली को पूरी तरह से अवैध बताते हुए ठेकेदार पर हठधर्मिता के आरोप लगाते हंै। इसको लेकर कई बार विवाद की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। इनमे से कुछ के तो पुलिस में प्रकरण तक दर्ज हुए हंै।
ठेकेदार को शीघ्र कार्य के दिए हैं निर्देश
सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। ठेकेदार को शीघ्र कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, पूर्व में सड़क पर कुछ जगह पेच वर्क कराया गया था,लेकिन सड़क का अधिकांश भाग क्षतिग्रस्त होने से नॉन पेचेबल में शामिल कर नवीन सड़क स्वीकृत कराई है।
सैयद शब्बीर अहमद, अधिशासी अभियंता, नेशनल हाईवे

Published on:
02 Jan 2019 12:14 pm