
राजसमंद. मरीजों की पीड़ा दूर करने के लिए भामाशाहों ने लाखों रुपए खर्च कर अस्पतालों को उपकरण भेंट किए, लेकिन सरकार और जिम्मेदार अधिकारी इनका संचालन तक नहीं करवा पा रहे। जबकि जिले में ऐसे भी दानदाता हैं जिन्होंने अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई परोपकार के लिए भेंट कर दी, और जिम्मेदार उसमें ताला जडक़र बैठे हैं। इससे जहां दानदाताओं के मन को ठेस पहुंच रही है, वहीं मरीज सेवाओं के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहें हैं।
राजस्थान पत्रिका टीम ने जिले के अस्पतालों की पड़ताल की तो सामने आया कि राजसमंद के कमला नेहरू चिकित्सालय पर लाखों रुपए खर्च कर गतवर्ष मरीजों के लिए बनवाई गई धर्मशाला पर ताला लटकर रहा है। इसीतरह देवगढ़ चिकित्सालय में पूरा आईसीयू वार्ड ही भामाशाह ने दान दे रखा है, लेकिन चिकित्सक के अभाव में ताला पड़ा है, उपकरण धूल फांक रहे हैं। जबकि देवगढ़ दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र होने से यहां आईसीयू की अधिक आवश्यकता है। ऐसी ही मिली-जुली स्थिति कुंभलगढ़, आमेट,भीम, रेलमगरा के अस्पतालों में भी देखने को मिलती है। यहां कई उपकरण सिर्फ विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से वर्षों से नकारा पड़े हैं। इसके चलते आमजन को इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है और सरकार के करोड़ों के संसाधनों की भी कोई उपयोगिता नहीं रह गई है। नाथद्वारा अस्पताल में १५ साल पूर्व हिंदुजा परिवार द्वारा अस्पताल को सोनोग्राफी मशीन भेंट की गई, अवधि पार होने के बाद सरकार ने यहां दूसरी मशीन दी लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में उसका संचालन नहीं हो रहा। जबकि मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। सबसे ज्यादा समस्या गर्भवती महिलाओं को आ रही है। श्री जसवंत चेरिटेबल ट्रस्ट ने देवगढ़ क्षेत्र को दुर्घटना बाहुल्य मानते हुए पूरा आईसीयू वार्ड मय उपकरण भेंट किया। लेकिन पिछले पांच वर्ष इस वार्ड में ताला लटक रहा है। यहां निश्चेतना विशेषज्ञ व सर्जन, फिजीशियन नहीं होने से मशीनें धूल फांक रही हैं, जबकि मरीजों को उपचार केलिए राजसमंद और उदयपुर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। रेलमगरा में लम्बे समय से रेडियोग्राफर नहीं होने से एक्स-रे मशीन बंद पड़ी है। इसीतरह आमेट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लगी मशीन लम्बे समय से बंद हैं। यहां प्रभारी चिकित्सक ने बताया कि मशीन ३० साल से अधिक पुरानी होकर खराब हो चुकी है। विभाग को इसबात की सूचना भेजकर नई मशीन मांगी है। मशीन आते ही रेडियोग्राफर की मांग की जाएगी।
कुंभलगढ़: दो साल से धूल फांक रही ईसीजी
क्षेत्र के पूर्व प्रधान सुरतसिंह दसाणा ने सीएचसी केलवाड़ा को एक ईसीजी मशीन भेंट की थी, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने के कारण पिछले दो सालों से मशीन नकारा पड़ी है। इसी तहर रेडियोग्राफर के अभाव में एक्स-रे मशीन भ
भीम : पद नहीं भरा, मशीन ही भेजी
भीम उपखण्ड मुख्याय स्थित सामुदायिक केंद्र में रोजाना करीब ५०० मरीजों का आउटडोर रहता है। यहां लम्बे समय से रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में सोनोग्राफी मशीन बंद थी, यहां रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति करने की बजाए मशीन ही ब्यावर भेज दी गई। इससे अब क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को खासी समस्याएं हो रही हैं।ी धूल फांक रही है, और रोजना दर्जनों मरीज ईसीजी और एक्स-रे के लिए उदुयपर और राजसमंद के चक्कर काट रहे हैं।