राजसमंद

राजसमंद में भाजपा-कांगे्रस के पारंपरिक वोट में सेंध नामुमकिन : काम नहीं हुआ, फिर भी नहीं बदलेंगे दल

बूथ 67 पर भाजपा एवं बूथ 135 पर कांग्रेस को मिले सर्वाधिक वोट
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राजसमंद में भाजपा-कांगे्रस के पारंपरिक वोट में सेंध नामुमकिन : काम नहीं हुआ, फिर भी नहीं बदलेंगे दल

राजसमंद विधानसभा में भाजपा व कांगे्रस को सर्वाधिक वोट दिलाने वाले बूथ पारम्परिक मतदाता वाले ही है, जो क्षेत्र का समग्र विकास नहीं होने के बाद भी दल बदलने को तैयार नहीं है। लोग खुलकर बोल रहे हैं कि पांच वर्षों में गांव- ढाणियों में कोई कार्य नहीं हुआ, मगर वे न तो दल बदलेंगे और न ही वोट। चुनावी परिपेक्ष्य में भाजपा विधायक व मंत्री किरण माहेश्वरी को पूरी विधानसभा क्षेत्र में बूथ 67 (राउमावि मुंडोल) है, जहां सर्वाधिक 1038 में से 818 वोट मिले, जबकि इसी विधानसभा क्षेत्र के बूथ 135 (राउप्रावि मेंघटिया कला) में कांगे्रस प्रत्याशी हरिसिंह राठौड़ को सबसे ज्यादा कुल 919 में से 642 वोट मिले। दोनों ही बूथ पर पारंपरिक वोटर है, जो काम नहीं होने की बात स्वीकारते हुए भी परंपरागत वोट देने की बात कह रहे हैं।

जहां थे सरताज, वहां क्या है आज
विधानसभा राजसमंद
बूथ नम्बर 67
मतदान केंद्र : राउमावि मुंडोल
2013 में कुल 1038 वोटर
भाजपा को सर्वाधिक 818 वोट मिले

नेताजी री खींचतान में पीस ग्या गाम वाळा
जिला मुख्यालय से करीब पांच किमी. के फासले पर पश्चिम दिशा में स्थित मुंडोल में भाजपा के परंपरागत वोटर है। मुख्य सडक़ से लेकर गली- मोहल्ले में भी व्यवस्थित सडक़ व नाली नहीं है। लोग कीचड़ से गुजरने को मजबूर है। डामरीकरण, नल विस्तार, स्कूल क्रमोन्नत कार्य हुए, मगर गिनने लायक काम नहीं है। मादड़ी में व्यवस्थित सडक़ें, सामुदायिक भवन है, पर समाजोत्थान के काम नहीं है। हाइवे आठ पर भगवान्दा से लेकर गेला की भागल, उमरियो की भागल, मादड़ी तक करीब दस से बारह किमी. तक फैले बूथ के ग्रामीण नगर निकाय की पेराफेरी का दंश भी भुगत रहे हैं। फिर भी ज्यादातर ग्रामीण भाजपा समर्थित है और खुलकर हमेशा रहने का दावा भी कर रहे हैं। अरणी व्यास ने कहा पूरा गांव भाजपा का है और रहेगा। फिर भी काम नहीं हुआ। शंकरलाल गुर्जर ने कहा मादड़ी में खूब हुए, जबकि मुंडोल कैलाश सेन ने कहा ५ साल में एक भी काम नहीं हुआ। फिर भी भाजपा को ही वोट देंगे। क्योंकि भाजपा ने भ्रष्टाचार कम किया। मुंडोल के मियाराम सालवी ने कहा कांगे्रस हो या भाजपा। किसी भी सरकार ने काम नहीं किया, नेताओं ने सिर्फ छुआछूत कर ग्रामीणों को बांटने को काम किया। तभी तो एक समाज का उत्थान कर रहे हैं, तो दूसरे समाज को नजरअंदाज। मैं तो इस बार दोनों दलों के किसी भी नेता को वोट नहीं दूंगा। गांव के लोग देहाती में बोले कि म्हाणो मुंडोल गाम भाजपा रा बड़ा नेताजी री गुटबाजी रे वसे पीस ग्यो। नेताजी री खींचतान है, एक- दूजा ने नजरे नी देके। अटा री गुजबाजी है, पण सरकार तो बीजेपी री ही वणावां। सरकार खूब परियास करी री है।



विधानसभा राजसमंद
बूथ नम्बर 135
मतदान केंद्र : राउप्रावि मेंघटिया कला
2013 में कुल 919 वोटर
कांगं्रेस को सर्वाधिक 642 वोट मिले


अणी सरकार मेंगाई बढ़ाई, बदलांगा सरकार
भाटोली पंचायत से मेंघटिया कला गांव के बूथ ६७ तक पक्की सडक़ है, मगर दोनों ओर से लटकती कंटीली झाडिय़ों से भी राहत नहीं मिल पाई। आधे किमी. तक कच्ची, ऊबड़ खाबड़ रास्ता ही विकास की पोल खोल रहा है, जहां परिवहन सुविधा के अभाव में सात किमी. पैदल चलकर ही बस पकडऩे का एकमात्र विकल्प है। ज्यों ज्यों आगे बढ़े, एक के बाद एक प्राथमिक समस्याएं सामने आती गई, जहां नालियों के अभाव में आम रास्ते पर गंदगी बह रही है और रोड लाइटों का कोई प्रबंध नहीं है। राउप्रावि मेंघटिया कला बूथ पर मेंघटिया खुर्द, नवाघर, रेबारियों की ढाणी तक करीब दस किमी. के दायरे में फैला है, जहां गायरी, सुथार, मेघवाल, धाभाई, राजपूत, रेबारी, गुर्जर, भील समुदाय के लोग रहते हैं। अधिकांश लोग कांगे्रस समर्थित है, जिनमें से कुछ लोगों ने पिछली बार भाजपा को वोट दिया, मगर इस बार फिर परंपरागत तरीके से कांगे्रस को वोट देने की बात कह रहे हैं। परिवहन, रोजगार, रोड लाइट की समस्याएं यथावत है, जहां के लोग विधायक और प्रतिद्वंद्वी दोनों से असंतुष्ट है। गंगाबाई सुथार बोली कि आवा-जावा रे वातरे बसां नी चाली। पैदल चालणो पड़े। मोहन सुथार बोले कि पाछी बीजेपी री सरकार ही वणावणी चावा। मेंघटिया कला के भंवर धाभाई बोले कांगे्रस री सरकार में गाम में काम चाल्या, लोगां ने रोजगार मल्यो। दूधा मेघवाल बोले- कीतर खेती करां। लाइटां रो कनेक्शन मले नी और डीजल मेंगो वेई ग्यो। बीजेपी वाला भाषण देणा हीक्या, पण काम तो कांगे्रस री सरकार ही करीन वतावे। दूधा मेघवाल ने कहा कि चुनाव री हवा चलावा लागी, पण अबाणु काई नी वताई सकां। नेता कनाई नी है, म्हारो वोट कने दूं। यो अबाणु नी वताई सकुं। रातोंरात बदली जा, वोट कने दूं, न कने नी दूं यो नी वताई सकुं।

Updated on:
17 Sept 2018 12:00 pm
Published on:
17 Sept 2018 12:00 pm