
राजसमंद. गच्छाधिपति प्रकाश चन्द्र के शिष्य विशाल मुनि की बैकुंठी यात्रा में जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। शहर के ज्ञान भवन से शुक्रवार सुबह से ही जैन समाज के लोग मुनिश्री के दर्शन के लिए आतुर दिखे। इस दौरान समाज के लोगों ने उनकी याद में प्रार्थना भी की।मुनि की डोल यात्रा ज्ञानगढ़ हाथीनाड़ा से शुरू हुई, जो जेके मोड़, बस स्टैण्ड व जलचक्की से होकर सुलूस रोड मोक्षधाम पर पहुंची। इस दौरान सैकड़ों श्रावकों की भीड़ ने उनके अंतिम दर्शन किए।
मूल रूप से गुजरात के रहने वाले
स्थानक समाज के मुनि विशाल मूल रूप से गुजरात के राजकोट में रहने वाले है। चार महीने पहले उनकी विहार यात्रा शुरू हुई। सर्वप्रथम देलवाड़ा में दो महीने रुके, उसके बाद कुंवारिया और फिर दो महिनों से राजसमंद के ज्ञानगढ़ हाथीनाड़ा में प्रवास पर थे। गुरुवार रात को देवलोकगमन हो गया।
इंजीनियर थे मुनिश्री
मुनि काफी शिक्षित थे और इंजीनियरिंग कर रखी थी। इसके चलते एक विदेश कम्पनी ने उन्हें नौकरी के लिए करोड़ों का पैकेज दिया। लेकिन, इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी उनका मन वैराग्य में रम गया और सांसारिक दुनिया छोडक़र वे त्याग के पथ पर अग्रसर हो गए।
मूल रूप से गुजरात के रहने वाले
स्थानक समाज के मुनि विशाल मूल रूप से गुजरात के राजकोट में रहने वाले है। चार महीने पहले उनकी विहार यात्रा शुरू हुई। सर्वप्रथम देलवाड़ा में दो महीने रुके, उसके बाद कुंवारिया और फिर दो महिनों से राजसमंद के ज्ञानगढ़ हाथीनाड़ा में प्रवास पर थे। गुरुवार रात को देवलोकगमन हो गया।
इंजीनियर थे मुनिश्री
मुनि काफी शिक्षित थे और इंजीनियरिंग कर रखी थी। इसके चलते एक विदेश कम्पनी ने उन्हें नौकरी के लिए करोड़ों का पैकेज दिया। लेकिन, इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भी उनका मन वैराग्य में रम गया और सांसारिक दुनिया छोडक़र वे त्याग के पथ पर अग्रसर हो गए।