राजसमंद

राजस्थान के इस जिले में पिछले पांच माह से नहीं मिल रही मौसम की जानकारी..पढ़े पूरा मामला

जिले में पिछले पांच माह से मौसम और तापमान संबंधी जानकारी नहीं मिल रही है। नाकली में लगा प्रोजेक्ट भी बंद हो गया है। इसकी जिम्मेदारी कोई लेना नहीं चाहता, इसके कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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गर्म कपड़े पहनकर सर्दी से बचने का प्रयास करती युवतियां

राजसमंद. जिला मुख्यालय पर पिछले पांच माह से मौसम की सटीक और सही जानकारी नहीं मिल रही है। इसके कारण आमजन को जिला मुख्यालय पर तापमान में उतार-चढ़ाव सहित अन्य जानकारियां नहीं मिल रही है। हालांकि नाकली में तामपान मापी यंत्र लगा हुआ था, लेकिन प्रोजेक्ट बंद होने से सुविधा भी बंद हो गई। उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के तत्वावधान में इंडियन काउंसिल एग्रीकलचर रिसर्च (आईसीएआर) के द्वारा 2012 से निकरा प्रोजेक्ट चलाया गया था। इसके तहत अमलोई, नाकली, भाटोली और मैनपुरिया गांव को गोद ले रखा था। यहां पर मौसम परिवर्तन और कृषि संबंधी रिसर्च के लिए नाकली में मौसम वेधशाला बना रखी थी। इससे प्रतिदिन सुबह 7.30 और दोपहर में 2.30 बजे डाटा लिया जाता था। यहां से तापमान, बारिश, मौसम, फसलों संबंधी एजवाइजरी आदि जारी की जाती थी। इससे आमजन को मौसम की सटीक और सही जानकारी मिलती थी, लेकिन भारत सरकार ने आईसीएआर के प्रोजेक्ट को बंद कर दिया। इसके बाद से जून माह से मौसम की जानकारी मिलना बंद हो गई। उक्त प्रोजेक्ट को बंद हुए पांच माह से अधिक होने के बावजूद अभी तक किसी ने इसकी सुध नहीं ली है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे है।

ऑनलाइन एप से नहीं मिलती सही जानकारी

जानकारों के अनुसार तापमान और मौसम संबंधी जानकारी के लिए भारत सरकार के मेघदूत एप से जानकारी लेने की बात कही जाती है, लेकिन अधिकांश बार इसके डाटा और वर्तमान परिस्थितियों में काफी अंतर दिखाई देता है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि ऑनलाइन एप से मिलने वाला डाटा पूरी तरह से विश्वसनीय नहीं होता है।

प्रोजेक्ट बंद, वहीं लगे यंत्र

उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.जगदीश चौधरी ने बताया कि निकरा प्रोजेक्ट के तहत नाकली में छोटी मौसम वेधशाला स्थापित की गई थी, लेकिन प्रोजेक्ट बंद होने से काम बंद कर दिया गया, लेकिन वहां पर लगाए गए यंत्र चालू अवस्था में वहीं पर लगे हुए हैं। सिर्फ उसे संचालित कर जानकारी जुटाई जा सकती है।

केवीके में भरपूर जगह, नहीं लेना चाहते जिम्मेदारी

जानकारों की मानें तो अधिकांश जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्र में मौसम वेधशाला (तापमापी यंत्र) बनी हुई है, वहां से ही मौसम संबंधी जानकारी मिलती है। यहां पर मौसम विभाग का दफ्तर भी नहीं है। ऐसे में केवीके में तामपान मापी यंत्र लगाया जा सकता है। वहां से मौसम संबंधी सटीक जानकारी मिल सकती है। पहले भी नाकली गांव में उक्त यंत्र लगा हुआ था, लेकिन जिला मुख्यालय से करीब 10-15 किलोमीटर की दूरी होने के कारण तापमान में काफी अंतर आता था। ऐसे में केवीके में तापमान मापी यंत्र लगने पर ही जिला मुख्यालय की सटीक जानकारी मिल सकती है और इसके लिए अतिरिक्त भुगतान भी नहीं करना पड़ेगा।

किसान को फंड उपलब्ध कराने के लिए लिखा पत्र

नाकली में एक किसान के खेत में वेधशाला बनी हुई है। इससे उसकी एक बीघा जमीन खराब हो रही है। मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए किसान को पांच हजार रुपए प्रतिमाह देने पर वह जानकारी उपलब्ध कराने को तैयार है। इसके लिए जिला कलक्टर से भी निवेदन किया था।

  • डॉ. पी. सी. रैगर, अध्यक्ष कृषि विज्ञान केन्द्र राजसमंद
Updated on:
21 Nov 2024 10:51 am
Published on:
21 Nov 2024 10:50 am
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