
(रांची): झारखंड सरकार की ओर से एक ओर जहां स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के अभाव के कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में नवनिर्मित स्वास्थ्य भवनों को हैंडओवर नहीं किया जा सका है और इन स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
104 भवन हस्तांतरित होने को कर रहे इंतजार
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य भवनों के निर्माण कार्य में जुटी एजेंसी से प्राप्त रिपोर्ट में बताया गया है कि 18 जुलाई तक 363 स्वास्थ्य केंद्रों एवं उपकेंद्रों के भवन बनकर तैयार हो चुके हैं, जिसमें से 258 भवनों को विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है, जबकि 104 भवनों के हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने को लेकर कार्रवाई चल रही है। वहीं 441 स्वास्थ्य भवन अभी निर्माणाधीन हैं।
रिक्त पदों को भरने का दिलाया गया भरोसा,नहीं हो रही कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान व्यवस्था के तहत पूर्व से संचालित अस्पतालों के अधीन कार्यरत चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से प्रतिनियुक्ति एवं अनुबंध के आधार पर नियुक्ति कर्मियों के माध्यम से कुछ नवनिर्मित भवनों का संचालन किया जा रहा है। विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2018-19 में नवनिर्मित भवनों के संचालन के लिए चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों के पद सृजन की कार्रवाई पूरी कर लेने का भरोसा दिलाया गया है।
गौरतलब है कि स्वास्थ्य उपकेंद्रों के निर्माण के लिए आईपीएचएस मानक के अनुरुप टी.एस.पी. क्षेत्र के लिए 3000 एवं ओएसपी क्षेत्र के लिए 5000 की आबादी पर एक स्वास्थ्य उपकेंद्र की स्वीकृति दी जानी है। आईपीएचएस मानक के अनुरूप ही विभाग द्वारा इन भवनों के निर्माण योजना को स्वीकृति दी गई थी, लेकिन मानव संसाधन एवं अन्य चिकित्सकीय उपकरणों के अभाव में एक बड़ी ग्रामीण आबादी को स्थानीय स्तर पर अब भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही है।