
झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC-JSSC रिफॉर्म्स मंच के नेतृत्व में चल रहा प्रदर्शन गुरुवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गया, लेकिन सरकार और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच गतिरोध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। इस बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास तक मार्च करने पर विचार किए जाने की खबर सामने आने के बाद मुख्यमंत्री आवास परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
प्रदर्शनकारियों के संभावित मार्च और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की आशंका को देखते हुए कांके रोड स्थित हेमंत सोरेन के आवास के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इलाके में कई स्तर की बैरिकेडिंग की गई है और अतिरिक्त सशस्त्र बलों की तैनाती की गई है। हाई सिक्योरिटी जोन में वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
इसका असर रांची के ट्रैफिक पर भी देखने को मिला। मोरहाबादी, कचहरी चौक और कांके रोड को जोड़ने वाले रास्तों पर सख्त बंदोबस्त किया गया है।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे JPSC-JSSC अभ्यर्थी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करना और कथित भर्ती अनियमितताओं की सीबीआई जांच शामिल है।
छात्र कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की समिति गठित कर जांच कराने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य की एजेंसियों की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है।
हालांकि, राज्य सरकार ने छात्रों को सीआईडी जांच और भर्ती परीक्षा प्रणाली में सुधार का भरोसा दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील कर चुके हैं। हालांकि, प्रदर्शनकारी CBI जांच की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
हाल के दिनों में झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं को लेकर सुधार की दिशा में कदम उठाए हैं। विवादों के बीच 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने का आश्वासन भी दिया गया है। लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र अपनी मांग पर कायम हैं।
सोमवार को छात्रों ने झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हो गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
पुलिस कार्रवाई के बाद राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया। भाजपा ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया और हेमंत सोरेन सरकार पर छात्र आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास भी बुधवार को प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि अगर एक सप्ताह के भीतर कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच की सिफारिश नहीं की गई तो वह भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
दास ने 2024 की एक्साइज कांस्टेबल भर्ती की शारीरिक परीक्षा के दौरान जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी उठाई है। इस भर्ती प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा पहले भी राज्य की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है।
इस आंदोलन का मुख्य चेहरा व JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो भी इस आंदोलन में भूख हड़ताल पर हैं। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने रांची के सिविल सर्जन से दोबारा प्रदर्शन स्थल पर लौटने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि उनका मन और आत्मा अब भी छात्रों के आंदोलन के साथ है।
महतो के अलावा भूख हड़ताल कर रहे चार अन्य छात्रों का भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
एक तरफ छात्र सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने जैसी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, वहीं सरकार अपनी जांच और परीक्षा सुधार की पेशकश को पर्याप्त मान रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई है और भाजपा पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। इस बीच झारखंड सीआईडी ने 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं के मामले में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।