रतलाम

कविता विचारों से आगे, अपने समय की विसंगतियों की गवाह भी है

रतलाम के आयोजन के दौरान वेदना के स्वर पर समीक्षा की, गोष्ठी में साहित्यकारों ने खुलकर चर्चा की। गोष्ठी में कविताओं के भाव, वैचारिक पृष्ठभूमि और अभिव्यक्ति के विभिन्न पक्षों पर विचार सामने आए।
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Oct 13, 2026
ratlam news
रतलाम के आयोजन के दौरान वेदना के स्वर पर समीक्षा की

रतलाम। कविता सिर्फ शब्दों और विचारों का संयोजन नहीं, बल्कि अपने समय की सच्चाइयों, विसंगतियों और रचनाकार की जिम्मेदारी का आईना भी है। प्रभावी लेखन के लिए गहन अध्ययन, गंभीर चिंतन और रचनात्मक संवेदनशीलता जरूरी है। इसी विचार के साथ जनवादी लेखक संघ की समीक्षा गोष्ठी में कवि रणजीत सिंह राठौर के काव्य संग्रह वेदना के स्वर पर साहित्यकारों ने खुलकर चर्चा की। गोष्ठी में कविताओं के भाव, वैचारिक पृष्ठभूमि और अभिव्यक्ति के विभिन्न पक्षों पर विचार सामने आए।

गहन अध्ययन से परिपक्व होता है कविता लेखन

गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने कहा कि कविता लिखना आसान नहीं है। रचनाकार का अध्ययन जितना गहन होगा, उसका लेखन उतना ही प्रभावी बनेगा। कवि को अपने समय के साथ पूर्ववर्ती रचनाकारों को भी गंभीरता से पढ़ना चाहिए। इससे लेखन में परिपक्वता आती है। उन्होंने राठौर के पहले काव्य संग्रह के प्रकाशन को सुखद बताते हुए कहा कि उनकी कविताएं वैचारिक पृष्ठभूमि को मजबूत करती हैं।

श्रेष्ठ रचना के लिए गंभीरता जरूरी

मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि कविता का अपना विकास क्रम होता है। किसी भी रचना के सृजन से पहले गंभीरता और संवेदनशीलता आवश्यक है। कालिदास और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे रचनाकारों की रचनाएं सघन अभिव्यक्ति का उदाहरण हैं।

कविताओं पर खुलकर हुई चर्चा

कवि रणजीत सिंह राठौर ने संग्रह की प्रमुख कविताओं का पाठ किया। उन्होंने कहा कि अपनी रचनाओं पर खुले मन से चर्चा सुनना लेखन में सुधार का अवसर देता है। संचालन करते हुए आशीष दशोत्तर ने कहा कि हर विचार कविता नहीं होता और कविता केवल विचार तक सीमित भी नहीं रहती। उसके पीछे मौजूद दृश्य ही कवि के मंतव्य को प्रभावी बनाता है।

साहित्यकारों ने रखी समीक्षा, हुआ अभिनंदन

गोष्ठी में मांगीलाल नगावत, विनोद झालानी, सिद्दीक रतलामी, कला डामोर, कीर्ति शर्मा, जितेंद्र सिंह पथिक, नरेंद्र सिंह डोडिया, इंदु सिन्हा, पूजा चोपड़ा, पुष्पलता शर्मा, डॉ. गीता दुबे सहित अनेक साहित्यकारों ने विचार व्यक्त किए। आयोजन में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी मौजूद रहे। अंत में विभिन्न संस्थाओं की ओर से कवि रणजीत सिंह राठौर का अभिनंदन किया गया।

18 अक्टूबर को तरहीनाशिस्त

जनवादी लेखक संघ के उर्दू विंग की ओर से 18 अक्टूबर को सुबह 11 बजे शहीद भगत सिंह पुस्तकालय, शहर सराय में तरहीनाशिस्त का चौथा सोपान आयोजित होगा। संयोजक सिद्दीक रतलामी के अनुसार, शायर ‘आंसू भी उनकी आंख का गौहरनुमालगे’मिसरे पर अपनी गजलें प्रस्तुत करेंगे।

Updated on:
13 Oct 2026 12:44 pm
Published on:
13 Oct 2026 12:43 pm