ब्राह्मण समाज का वर्चस्व 90,000 वर्षों से अपने जप-तप त्याग एवं ज्ञान के कारण है, लेकिन आज ब्राह्मण समाज अपने वेदों, उपनिषदों, शास्त्रों, पुराणों के ज्ञान जप-तप एवं त्याग से दूर होता जा रहा है । इसी कारण ब्राह्मण समाज से ईष्र्या रखने वाले अयोग्य लोग को ब्राह्मणों के खिलाफ आम लोगों को भड़काने का अवसर मिल रहा है। ब्राह्मण समाज को यह बात समझकर संगठित होकर पुन: अपने जप तप त्याग एवं हमारे शास्त्रों के ज्ञान की ओर लौटना चाहिए।
यह बात सर्व ब्राह्मण समाज द्वारा गंगा आश्रम पर आयोजित श्रावणी उपाकर्म के आयोजन की बैठक के मुख्य अतिथि शाजापुर से पधारे ब्राह्मण चेतना मंच के अध्यक्ष गोवर्धनलाल शर्मा ने कही। शर्मा ने आगे कहा कि देश में लोकतंत्र पतीत होकर भीड़तंत्र में बदल रहा है, इसीलिए सत्ता पानेवाले भी योग्यता के बजाय भीड़ का समर्थन करते हैं।
श्रावणी उपाकर्म 7 अगस्त को
बैठक में विशेष अतिथि प्रेम उपाध्याय थे एवं अध्यक्षता मनकामनेश्वर जोशी ने की। कार्यक्रम के सूत्रधार पुष्पेंद्र जोशी ने कहा कि हमें ब्राह्मणवाद के बजाय ब्राह्मणत्व की ओर बढऩा चाहिए। श्रावणी उपाकर्म का आयोजन
पर 7 अगस्त को प्रात: 6.30 बजे गंगा आश्रम सागोद रोड रतलाम पर रखा है।
बैठक में त्रिभुवनेश भारद्वाज, द्वारका पालीवाल, अजय तिवारी, प्रकाश उपाध्याय ने भी विचार रखे। बैठक में पंडित रामचन्द्र शर्मा, वीरेंद्र वाफगावकर, नवनीत मेहता, सूर्यकांत उपाध्याय, संजय दवे, रतन व्यास, प्रकाश जोशी, मिलिंद करिनदिकर, पं. शशिप्रकाश जोशी, दिलीप बर्वे आदि उपस्थित थे। संचालन ब्रजेन्द्र मेहता एवं आभार सत्यदीप भट्ट ने किया।