रतलाम

अरे… इतने विद्यार्थी, बैठने की जगह नहीं बची

वाणिज्य महाविद्यालय जनभागीदारी समिति अध्यक्ष ने भी खड़े किए सवाल, हो रही है विद्यार्थियों को परेशानी
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Updated: 11 Dec 2017, 9:06 PM IST
patrika

रतलाम। शासकीय स्वामी विवेकानंद वाणिज्य महाविद्यालय में इस समय चल रही परीक्षा में हालत यह हो गए कि यहां क्षमता पांच सौ विद्यार्थियों की है और परीक्षा में डेढ़ गुना ज्यादा यानि साढ़े सात सौ से ज्यादा विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। इसका असर यह हो रहा है कि परीक्षा कक्षों में बैठने की व्यवस्था ही गड़बड़ा रही है। पासपास में टेबलें लगाकर जैसे-तैसे विद्यार्थियों को एडजस्ट किया जा रहा है। इस अव्यवस्था को लेकर जनभागीदारी समिति अध्यक्ष राकेश मिश्रा ने भी सवाल खड़े किए हैं। उनका मानना है कि परीक्षा में जिनती सुविधा विद्यार्थियों को लिखने और बैठने की मिलना चाहिए उतनी नहीं होने से परेशान हो रहे हैं।

चार कॉलेजों के विद्यार्थी

स्वामी विवेकानंद वाणिज्य महाविद्यालय में इस समय चार कॉलेजों के विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए केंद्र बनाया है। विक्रम विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों का सेंटर वाणिज्य महाविद्यालय को ही बनाया है। इनमें एसएसआईटी, रॉयल, लॉ और खुद वाणिज्य महाविद्यालय के विद्यार्थी भी हैं। इन सभी के मिलाकर करीब साढ़े सात सौ विद्यार्थी एक साथ परीक्षा देने पहुंचते हैं। ऐसे में कॉलेज में गिनेचुने कमरों और फेकल्टी की वजह से व्यवस्था करना मुश्किल हो गया है।

निजी कॉलेजों से लाना पड़ रहा फर्नीचर

निजी महाविद्यालयो से फर्नीचर मंगवाकर परीक्षाएं आयोजित करवाई जा रही है। अव्यवस्थाओ के बीच स्वामी विवेकानंद वाणिज्य महाविद्यालय में सोमवार को 753 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपनी बचत करने के लिए एक साथ सभी कॉलेजों को यहां की अनुमति दे दी किंतु दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। परीक्षा संचालन के लिए कॉलेजों में प्राध्यापकों व कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए दूसरे कॉलेजों से फैकल्टी भी बुलाना पड़ रही है।

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बहुत परेशानी आ रही परीक्षा में

परीक्षा संचालन में काफी दिक्कतें आ रही है। हमारे कॉलेज के साथ ही तीन अन्य निजी कॉलेजों के विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्र भी यही है। सभी की एकसाथ परीक्षा होने से कमरों की कमी और प्राध्यापकों की संख्या की कमी प्रमुख दिक्कत है। बड़ी मुश्किल से परीक्षा आयोजित करना पड़ रही है। निजी कॉलेजों से फर्नीचर और फैकल्टी लाना पड़ रही है।

डॉ. लक्ष्मी दत्ता, प्राचार्य वाणिज्य महाविद्यालय

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