रतलाम

भारतीय पर्यटन दिवस पर विशेष VIDEO

पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के लिए कई संभावनाएं है। कई योजनाएं बनी, लेकिन मूर्त रूप नहीं ले पाई है। अगर शहर के मांगल्य मंदिर, कालिका माता मंदिर, गुलाब चक्कर और जिले में पर्यटकों के लिए धोलावाड़ टूरिज्म, सैलाना केक्ट्स गार्डन, खरमोर अभ्यारण्य, केदारेश्वर, गढख़ंखाई माताजी, माही नदी, चंबल संगम, जावरा हुसैन टैकरी आदि प्रसिद्ध स्थल हैं, लेकिन जनसुविधों के अभाव में यहां तक पर्यटक पहुंच पा रहे हैं।

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Jan 25, 2020
भारतीय पर्यटन दिवस पर विशेष VIDEO

रतलाम. पर्यटन क्षेत्र विकसित करने के लिए कई संभावनाएं है। कई योजनाएं बनी, लेकिन मूर्त रूप नहीं ले पाई है। अगर शहर के मांगल्य मंदिर, कालिका माता मंदिर, गुलाब चक्कर और जिले में पर्यटकों के लिए धोलावाड़ टूरिज्म, सैलाना केक्ट्स गार्डन, खरमोर अभ्यारण्य, केदारेश्वर, गढख़ंखाई माताजी, माही नदी, चंबल संगम, जावरा हुसैन टैकरी आदि प्रसिद्ध स्थल हैं, लेकिन जनसुविधों के अभाव में यहां तक पर्यटक पहुंच पा रहे हैं। रतलाम को पर्यटन के रूप में फिर विकसित करने के लिए अब राज्य स्तर पर तैयारी प्रारंभ कर डीपीआर तैयार कर पुन: विकसित किया जाएगा।

दो सर्किट पर काम

पर्यटन के रूप में दो सर्किट पर काम किया जाएगा, पहले भारत सरकार के माध्यम से काम होना था, लेकिन योजना बंद होने के बाद अब राज्य स्तर पर काम शुरू किया जाएगा। जिला पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जावरा की प्रसिद्ध हुसैन टैकरी क्षेत्र को विकसित कर जन सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए १५ करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर पर्यटन विभाग भोपाल को भेज दिया गय है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जनसुविधा के हिसाब से प्रस्ताव तैयार कर दिए गए है, उन पर काम होना है। चंबल-क्षिप्रा नदी शिपावरा संगम पर महादेव मंदिर के संरक्षित करने के लिए 1 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार कर भेजा गया है। राशि मंजूर होते ही इन स्थानों पर पर्यटकों को बेहतर सुविधा मिले, इस मान से काम शुरू किया जाएगा। सैलाना रियासत काल के महाराजा ने जर्मनी के कैक्टस गार्डन के आधार पर 1959 में महल के पृष्ठ भाग में नागफनी कैक्टस का उद्यान विकसित किया, तो पूरे एशिया में सुप्रसिद्ध है इस उद्यान में 2500 प्रजातियों की प्रैक्टिस लगे हुए हैं, जिसमें 40 से 50 फीट लंबाई के शामिल है। उद्यान पर्यटन एवं वनस्पतियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

यह है जिले में खास
सैलाना धोलावाड़ पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित किया गया। रतलाम गुलाब चक्कर, कालिका माता मंदिर, झाली तालाब के बाद लोगों को मांगल्य मंदिर, शीतल तीर्थ धामनोद, कालिका माता धाम धामनोद, दुर्लभ पक्षी खरमोर अभयारण्य सैलाना, कीर्ति स्तंभ सैलाना, कैक्टस गार्डन सैलाना होते हुए छोटा केदारेश्वर बांसवाड़ा मार्ग केदारेश्वर मंदिर होते हुए शिवगढ़ मार्ग पहुंचा जा सकता है। धोलावाड़ जलाशय और यहीं से माही नदी, गढ़ खंखाई माताजी होकर भी पहुंचा जा सकता है। इसके बाद शिवगढ़ से ही जामण नदी, पर्यावरण पार्क और जैन तीर्थ भी बिबड़ोद होते हुए पुन: रतलाम पर्यटक आ सकते हैं।

Published on:
25 Jan 2020 11:35 am
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