
रतलाम। खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था और करोड़ों परिवारों की जिंदगी का आधार है। इसके बावजूद किसानों को आर्थिक परेशानियों और अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन्हीं सवालों को केंद्र में रखकर बनने वाली फिल्म ‘कृषिका- किसान की बेटी’ खेती और किसानों के प्रति समाज की सोच बदलने का संदेश देगी। फिल्म के निर्देशक तारिक भट्ट के अनुसार, इसका उद्देश्य किसानों की समस्याओं को सामने लाने के साथ खेती में छिपी संभावनाओं और सम्मान को भी उजागर करना है। फिल्म एक ऐसी बेटी की कहानी है, जो शिक्षा, आधुनिक तकनीक और अपने पिता के अनुभवों के सहारे कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने का संकल्प लेती है। बड़ी बात यह है फिल्म की पूरी शूटिंग मप्र के अलग-अलग शहरों के साथ एक बड़ा हिस्से को रतलाम में फिल्माया जाएगा। फिल्म की शूटिंग सोमवार से रतलाम में होने जा रही है। पत्रिका ने फिल्म के डायरेक्टर तारिख भट्ट से लंबी बात की प्रस्तुत है संपादित अंश।
पत्रिका:‘कृषिका’ बनाने के पीछे आपकी क्या सोच रही?
तारिक : ‘कृषिका’ हमारे लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बदलाव की सोच है। हम चाहते हैं कि दर्शक खेती को केवल संघर्ष और मजबूरी के रूप में न देखें, बल्कि इसे सम्मानजनक और संभावनाओं से भरे व्यवसाय के रूप में भी समझें। किसानों की आर्थिक परेशानियों और आत्महत्या जैसे गंभीर विषयों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाना जरूरी है।
पत्रिका : फिल्म की कहानी दर्शकों को क्या संदेश देगी?
तारिक : कहानी कृषिका के पिता से शुरू होती है, जो दूसरे शहर में कृषि और किसानों से जुड़े काम करते हैं। गांव में उनके करीबी मित्र की किसान जीवन की परेशानियों के बीच आत्महत्या उन्हें भीतर तक झकझोर देती है। वे नौकरी छोड़कर गांव लौटते हैं, ताकि किसानों की समस्याओं को समझकर समाधान तलाश सकें। पढ़ाई पूरी करने के बाद कृषीका भी गांव लौटती है और आधुनिक शिक्षा व तकनीक के जरिए पिता के प्रयासों को आगे बढ़ाती है। पिता के जाने के बाद क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
तारिक : नई पीढ़ी की शिक्षा, तकनीकी समझ और पुरानी पीढ़ी के अनुभव मिलकर खेती में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। हम चाहते हैं कि युवा अपनी मिट्टी से जुड़ें और कृषि को नए अवसरों के रूप में देखें। फिल्म के लेखक एवं निर्माता आनंद मनवानी हैं। सोना एंटरप्राइजेज के बैनर तले बनने वाली इस फिल्म में ईशा शर्मा, हितेन तेजवानी और अवीरखेजा प्रमुख भूमिकाओं में हैं। ‘कृषिका’ किसानों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद को पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
तारिक: देश में दस सालों में जो बडे़ किसान आंदोलन हुए, उसकी शुरुआत रतलाम और मंदसौर से हुई। देश में किसानों के लिए नई योजनाएं बन रही है, लेकिन अब भी प्राकृतिक आपदा पर मुआवजा को लेकर कोई साफ नीति नहीं है। इन सब बात को सोचकर ही रतलाम में कृषिका फिल्म का एक बडा हिस्सा शूट कर रहे है।https://instagram.com/tariqbhatofficial?mdxt=OW9hc3U3ZzA2OHdm