सायबर ठगों के निशाने पर अब रेलवे कर्मचारी है, जिन्हें वो बड़े शातिर तरीके से अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं। उन ठगों के नंबर नीचे दिये गए हैं। ऐसे कोई नंबर आपके फोन पर आएं और आपसे निजी जानकारी की मांग करें, तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि वो आपके खाते में जमा रकम साफ कर देंगे, पढ़िये ये खास रिपोर्ट।
रतलामः सायबर ठगों की तेढ़ी नज़र अब इंडियन रेलवे के कर्मचारियों पर पड़ गई है। बीते कुछ दिनों से रेलकर्मियों के पास फर्जी नंबरों से फोन आ रहे हैं। फोन लगाने वाला व्यक्ति खुद को डीआरएम ऑफिस का बताकर रेलकर्मी से उसकी सारी निजी जानकारी ले लेता है। इसके बाद अचानक रेलकर्मी के खाते में जमा राशि निकाल ली जाती है। हैरानी की बात ये है कि, रेलकर्मियों को ठगने वाले खास नंबर रेलवे के अधीन कार्यरत अधिकारियों या विभागीय स्तर पर ही अलॉट किये जाते हैं, यानी ठगी का शिकार होने वाले व्यक्ति को सामान्य तौर पर समझ ही ना आए कि, ये नंबर कहीं और का हो सकता है। इसी वजह से ठगों के जाल में मंगलवार को भी एक रेलकर्मी फंस गया और करीब 26 हजार रुपये की ठगी का शिकार हो गया। हालांकि, रेलकर्मियों से ठगी के मामले को लेकर रेलवे के आला अधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर ठगों पर कार्रवाई की मांग की है।
पत्र में कही ये बात
एसपी गौरव तिवारी को मंगलवार को वरिष्ठ मंडल कर्मिक अधिकारी पीके गोपीकुमार ने पत्र लिखकर बताया कि, कुछ दिनों से ठग रेलकर्मियों को फोन करके बैंक, एटीएम के डिटेल और ओटीपी नंबर के माध्यम से शिकार बना रहे हैं। इतना ही नहीं, भीम एप और उम्मीद मेडिकल कार्ड के ठग रेलकर्मियों से जानकारी जुटाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। सीनियर डीपीओ ने इन ठगों के कुछ मोबाइल नंबर भी एसपी को दिये हैं, जिन नंबरों के जरिये अब तक रेलकर्मियों को ठगा गया है। डीपीओ के पत्र के बाद एसपी ने सायबर सेल उक्त नंबर देकर उन्हें ट्रेस कर आरोपियों का पता लगाकर उन्हें पकड़ने के निर्देश दिये हैं।
इन नंबरों से ठगे गए हैं रेलकर्मी
रेलकर्मियों से फोन पर रेलवे अधिकारी बनकर जानकारी लेने वाले ठगों के सांबंध में रेलकर्मियों ने डीआरएम को भी पत्र लिखा है। उसमें बताया गया कि, उन्हें ठगी के लिए अब तक किन नंबरों से फोन आए हैं। कर्मचारियों ने बताया कि, उन्हें 6291641073, 6207387326 और 9064415576 से फोन आ रहे हैं। इन नंबरों के माध्यम से ठग रेलकर्मियों से जानकारी जुटाकर उनका खाता खाली कर रहे हैं। ठगी का शिकार हुए कर्मचारियों ने बताया कि, फोन लगाने वाले की ओर से कहा जाता है कि, रेलवे के अकाउंट डिपार्टमेंट के पीएफ सेक्शन से बात कर रहा है। सभी को उसने अब तक अपना नाम अरुण श्रीवास्तव बताया है। इस तरह पहले रेलकर्मी को अपने भरोसे में लेकर रेलवे की ओर से मेडिकल कार्ड बनाने के नाम पर खाते की नीजि जानकारी मांगता है, जैसे ही रेलकर्मी द्वारा उसे संबंधित जानकारी दी जाती है, वैसे ही रेलकर्मी के खाते से पूरे पैसे निकाले जाने का मेसेज आता है।
इस तरह रेलकर्मी बन रहे ठगी का शिकार
रेलकर्मी के मुताबिक, रेलवे में एसएचओ के पद पर पदस्थ एससी पटेल के मोबाइल पर भी इन्ही में से एक नंबर से कॉल आया, जिसने उनसे खाते से संबंधित जानकारी मांगी। जानकारी पूर्ण होते ही उनके मोबाइल पर अलर्ट मेसेज आया कि, उनके खाते में रखी शेष राशि 26500 रुपये निकाले गए हैं। इसके अलावा लोको पायलट देवी सिंह आर से भी फोन पर इसी तरह की जानकारी मांगी गई, लेकिन खाते में राशि ना होे के कारण वो ठगी का शिकार नहीं बन सके। उन्होंने बताया कि, उनके खाते में लोन की राशि आने वाली थी, ऐसी स्थिति में जब उन्हें इस तरह से ठगी की बात पता चली तो उन्होंने तुरंत बैंक से मिलने वाली लोन राशि को रुकवाया, ताकि ऐसा ना हो कि, खाते में रकम आते ही टगों द्वारा उसे उड़ा दिया जाए। देवी सिंह आर जब तक बैंक से इस बात के प्रमाण नहीं मिल जाएंगे कि, उनका खाता पूरी तरह सुरक्षित है, वो खाते से किसी तरह का ट्रांजेक्शन नहीं करेंगे।
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मज़दूर संघ और यूनियन पदाधिकारी मिले
रेलकर्मियों से ठगी के मामले में वेस्टर्न रेलवे मज़दूर संघ युवा समिति अध्यक्ष गौरव दुबे, वाजिद खान ने भी एसपी को आवेदन दिया, साथ ही वेस्टर्न रेलवे के इंप्लाइज़ यूनियन के अशोक तिवारी समेत अन्य अधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कर्मचारियों को समझाइश दी कि, वो अब किसी को भी अपनी निजी जानकारी नहीं देंगे।