जिले के सभी विकासखंडों पर इस बार
है तो पिछले साल की तुलना में और सामान्य से अब तक अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। वैसे इस वर्ष जुलाई में जिले की औसत वर्षा 16 इंच से अधिक दर्ज की जा चुकी है। पिछले छह सालों में जुलाई माह के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 2015 में 37 इंच और 2013 में 27 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
मौसम वैज्ञानिक और कृषि विभाग की माने तो इस वर्ष बारिश अच्छी हुई, रिमझिम बारिश से जल स्तर में वृद्धि होगी और आगामी दिनों के लिए भी परेशानी नहीं रहेगी। वैसे लगातार बारिश से फसलों में इल्ली का असर शुरू हो गया, जिसे कृषक भाई वैज्ञानिकों की सलाह अनुसार दवाई का छिड़काव कर नियंत्रण करे, क्योंकि मौसम खुलते ही इल्ली का प्रकोप सोयाबीन की फसल पर बड़ेगा।
औसत वर्षा से 5 इंच अधिक बारिश
जिले की औसत वर्षा अब तक 539.8 मिमी दर्ज हो चुकी है, जबकि पिछले सात 472.0 मिमी बारिश हुई थी। इसके तुलना में जारी
के दौरान 67.8 मिमी बारिश अधिक हो चुकी है। जबकि जिले की सामान्य बारिश 415.4 मिमी मानी गई है। इसकी तुलना में 5 इंच अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। जून माह में जहां जिले में 127.0 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। जुलाई माह में 412.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है।
जुलाई माह-वर्ष औसत वर्षा इंच में रतलाम में
रतलाम की बारिश वर्तमान स्थिति
ने बताया कि लगातार आठ-नौ दिनों से हो रही बारिश के कारण सोयाबीन की फसल में कुबड़ी इल्ली, तम्बाकु केटर पीलर की शुरुआत हो चुकी है। मौसम खुलते ही यह जल्दी वृद्धि करती है। साथ ही गर्डल बिटल भी शीघ्र ही आ जाएगी। ये इल्ली पौधे के पत्ते और फूल को नष्ट कर देती है, जिससे वृद्धि प्रभावित हो सकती है। किसान भाई इसके नियंत्रण के लिए प्रोफनेफॉस 2 एमएल प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करे या फिर ट्राइजोफॉस 2 एमएल प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करे। प्रति बीघा कम से कम 5 टंकी का छिड़काव करे।
जहां फसल पिली पड़ गई वहां ये डाले
गोयल के अनुसार लगातार वर्षा होती आ रही है, इस कारण जल भराव और लगातार नमी के स्थिति में पौधे पोषक तत्वों नहीं ले पाते हैंं। फसलों को रंग पीला पडऩे लगता है। ऐसी स्थिति में घुलनशील उवर्रक एमपीके का 50-60 ग्राम प्रति टंकी 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करे या घुलनशील सल्फर का भी छिड़काव कर सकते हैं।
इल्ली का सोयाबीन पर होने लगा असर
रिमझिम बारिश में पत्ती खाने वाली इल्ली कलियां, फूल या नन्ही फलियों को काटकर नुकसान पहुंचा रही है। ऐसे में अफलन की स्थिति भी उत्पन्न होने की आशंका रहती है। जिन किसानों के सोयाबीन में यह स्थिति नजर आता है वे फसल विशेषज्ञ से चर्चा कर नियंत्रण के उपाय करे। मौसम सोयाबीन में जो कीड़ा पनपता उसके लिए उपयुक्त है। ऐसे में थोड़ा मौसम साफ रहे, तभी दवाई का छिड़काव करे। कई क्षेत्रों में भ्रमण के बाद हमने किसानों को सलाह भी दी है कि ऐसे मौसम में कीड़ा और रोग दोनों फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र कालूखेड़ा, रतलाम