
रतलाम। महानवमी के अवसर पर रतलाम के कालिका माता मेले के मंच पर आयोजित कवि सम्मेलन में आए देश के बडे़ गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना ने बड़ा बयान दे दिया है। पत्रिका से बात में डॉ. सक्सेना ने इसको देश के लिए दुर्भाग्य वाला कदम बताया है। डॉ. सक्सेना देश ही नहीं विदेश में भी गीत-गजल के लिए जाने जाते है।
डॉ. सक्सेना का कहना है जो हाल ही में कलाकारों के खिलाफ मॉब लिचिंग के मामले में जो बिहार में एफआईआर दर्ज की गई वह देश के लिए दुर्भाग्य वाला कदम है। जिस देश में पत्रकार, कलाकारों, लेखकों, कवियों पर मुकदमें दर्ज हुए है, ये वे लोग है जो देश के राजा के सामने वह बात रखते हंै कि राजा कहा गलती कर रहा है, इन्ही की आवाज को दबाना गलत है। पेशे से डॉक्टर विष्णु सक्सेना ने कहा कि काव्य मंचों से कविता के नाम पर जो चुटकुले सुनाए जा रहे हैं वह अच्छी परम्परा नहीं है। यश भारती पुरस्कार प्राप्त डॉ. सक्सेना ने बताया कि उनको जो ११ लाख रुपए का पुरस्कार मिला था, इसके बाद 2015 से देश के नये गीतकारों के लिए वर्ष में एक बार स्पर्धा की शुरुआत की।
उदयपुर से शुरू हुआ सफर
विजेताओं को पुरस्कृत करते है, नये गीतकार आ रहे हैं। शेष राशि से जरुरतमंद बालिकाओं की स्कूल फीस जमा होती है। स्पर्धा में इस साल पहली बार म्यूजिरम से भी प्रवृष्टि आई है। एक सवाल के जवाब में डॉ. सक्सेना ने कहा कि गीत की शुरुआत उन्होंने उदयपुर में डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान शुरू की थी। राजस्थान के कई शहरों में उन्होंने नौकरी की। डॉ. सक्सेना से जब पूछा गया कि देश भर में सबसे खराब सड़के कहा कि है कि उनका कहना था कि पहले बिहार की थी अब उत्तर प्रदेश की है, लेकिन मध्यप्रदेश की सड़कें सुधर गई है।
तड़के चार बजे तक चलता रहा
मां कालिका के दरबार में नवरात्र के अंतिम रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन देशभक्ति के नाम रहा, वीर-हास्य रस के कवियों के साथ ही गीतकार ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। शुरुआत में भोपाल से आए वीर रस के कवि मदन मोहन समर जैसे ही...जनगणमन अधिनायक जय का मंगल गान हुआ है... सच पूछों तो काश्मीर अब हिन्दुस्तान हुआ है।। सैनिक सीमा साधे रहना, हम भीतर देश बचाएंगे। तुम कसम निभाना सरहद की हम अपना नमक चुकाएंगे।। चौथे रण के लिए चुनौती है तेरी स्वीकार हमें। लिए तिरंगा अभी पहुंचना पीओके के पार हमें।। सुनाकर श्रोताओं का बांध दिया। इसके बाद एक से बढ़कर एक कवि और गीतकार डॉ. विष्णु सक्सेना अलीगढ़ ने अपने अंदाज में गीत गुनगुनाया...बनेगी बात नई, सोच बदल के देखो, रहो कहीं भी मगर ख्वाब महल के देखो। खुलेंगीं खिड़कियां और आसमां अपना होगा, जरा हिम्मत करो और घर से निकल के देखो। कवि सम्मेलन में स्थानीय कवि धमचक मुल्थानी ने भी अपनी ओज कविताओं से छाप छोड़ी।
ये सुनाया कवियों ने देर रात तक
कवियत्री योगिता चौहान ने ...चुड़ी तेरे बगैर ना कंगन तेरे बगैर...। भाता नहीं है, मुझको ये दर्पण तेरे बगैर...। सूनी मेरी हथेली है मौका हिना का है...,कैसे बनंू बता दे मैं दुल्हन तेरे बगैर ।। सुनाकर भाव विभोर कर दिया।
पायल की छन-छन ना हो दावन संहार जरूरी है, बहन बेटियां जिसने लूटी वो प्रतिकार जरूरी है। उठो सिंहनी अब दुष्टों का मस्तक धड़ से अलग करो, चूड़ी वाले कोमल हाथों में तलवार जरूरी है।
डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने वीररस के कवि जो बुलंदशहर से आए थे सुनाया कि...अनुचित करनी पर मौन रहे सबके सब दागी होते हैं। करते अन्याय समर्थन जो अपयश के भागी होते हैं।।
दिनेश सिंदल जोधपुर- फूल हूं संग में खुशबू का सफर लाया हूं, मैं हवाओं पे तेरा नाम लिखने आया हूं। हमने अपने दिल में ही खुद आग लगाई थी, मौसम बारूदी था और तुम दिया सलाई थी...।।
प्रभावी संचालन करते हुए प्रो. राजीव शर्मा इंदौर ने अपनी पंक्तियां जो लोग इबादत अपने कर्म की सुबहोशाम करते हैं, चांद और तारे भी झुककर उसे सलाम करते हैं, सूरज अघ्र्य चढ़ाता है, उस इंसान को, जो अपना जीवन वतन के नाम करते हैं।
कवि बदम् अलबेला ने कविता पाठ करते हुए कहा कर्म उजागर हो रहे बाबा है, भयभीत हनिप्रीत की प्रीत में तड़प रहे गुरुमीत। सज धज के गोरी चली लेकर हरि का नाम, आशा की थी राम की मिल गए आसाराम...।
बनारस से आए डॉ. अनिल चौबे ने मिल गया ट्रैफिक हवलदार आज मुझे सारी, कविताई को किनारे छांट दिया है। जितने में गाड़ी न कबाड़ी कोई पूछ रहा, उससे अधिक का चालान काट दिया है।
अर्जुन अल्हड़ कोटा राजस्थान ने सुनाया कि भारत के टुकड़े करने की जिन लोगों ने ठानी, हम उनके टुकड़े कर देंगे ऐसी जिनकी बानी। वंदेमातरम् जनगणमन की चले लहर तूफान
ी, हिन्दुस्तान में वहीं रहेगा जो है हिन्दुस्तानी।। माना जरूरी है, जिन्दगी हंसना और हंसाना। माना जरूरी है इंसान को गमों में मुस्कुराना।। पर जिन शहीदों ने आजादी के हवन कुंड में प्राण आहुत कर दिए, सबसे ज्यादा जरूरी है उनकी चिताओं पर श्रद्धा पुष्प चढ़ाना...।