करमचंद उपाश्रय में चातुर्मासिक धर्म आराधना में देवसूर तपागच्छ चारथुई श्रीसंघ द्वारा आचार्य विवेकचंद्र सागर, गणिवर्य प्रसन्न चंद्रसागर, मुनि परमचंद्र सागर, साध्वी शीलरेखाश्री की निश्रा में चल रही है। नवकार तप उपासकों को सोमवार सुबह आयंबिल तप के साथ तप क्रिया करवाई गई।
शांतिनाथ आज 15वें दिन में प्रवेश कर गया। सुबह प्रवचन में महाराजश्री ने फरमाया कि प्रमाद, आलस्य, निद्रा रोग से मुक्त होने के लिए सत्कार्य करते रहे। पारस भंडारी ने बताया कि शांतिनाथ चरित्र की विवेचना पूज्यश्री ने की। आराधकों ने सुंदर गहुली पाटलो पर सजाकर तप आरोधना की।
स्वंय कि निंदा से अशुभ कर्म क्षय होते है। महासती
व्यक्ति स्वयं के कर्मो को बंध तीन प्रकार से कम करता है, पहला स्वयं आत्म अवलोकन से अपने दोषों को देखता है व निंदा करता है। दूसरा वह गुरूजनों के सामने अपने दोषों को प्रकट कर आलोचना करता है, अथवा सबके सामने समाज के बीच में अपने दोषों को उजागर कर उसकी आलोचना करता है। अपने कर्मो के क्षय के लिए आलोचना करना आलोचना की कार्यशैली पराक्रम सम्यकत्व आत्मा ही कर सकती है। ये विचार महासती सुशिलाकंवर महाराज ने महत्ती धर्मसभा में समता भवन में व्यक्त किए। महासती समीक्षणाश्री ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। चंदनमल छाजेड, सुदर्शन पिरेादिया, महेन्द्र गादिया ने बताया कि समता भवन नौलाईपुरा पर प्रतिदिन प्रवचन चल रहे है। मोनिका संजय बम्बोरी ने 22 के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।
शरीर नश्वर है आत्मा अमर है
शरीर नश्वर है, आत्मा अमर है। आत्मा के सबसे निकट रहने वाला शरीर है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक बना रहता है । जिस प्रकार वृक्ष का पत्ता पहले लाल फिर हरा व अंत में पीला होकर गिरकर नष्ट हो जाता है उसी प्रकार शरीर भी पीले पत्ते तरह मृत्यु को प्राप्त कर नष्ट हो जाता है । यहा विचार महासती इन्दुप्रभा महाराज ने नीमचौक स्थानक पर प्रवचन में व्यक्त किए। महासती निपुणप्रभा ने भी संबोधित किया। संघ के वरिष्ठ श्रावक सुरेन्द्रकुमार बोथरा के 9 उपवास पूर्ण होने पर श्रीसंघ द्वारा बहुमान किया गया । पंकज पटवा, सुशील बोहरा, प्रकाश रांका, संजय बोथरा ने तपस्या के संकल्प लेकर बोथरा का स्वागत किया ।