रतलाम

जैन ग्रंथ जीवन बदलाव का आधार, गुरु मार्गदर्शन से आत्मकल्याण

Aug 01, 2026
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datia news (भाई ने की भाई की हत्या Photo Source- Patrika)

फोटो-आरटी-0106

आलोट. नगर में चल रहे द्विशताब्दी चातुर्मास महोत्सव के अंतर्गत दैनिक धर्मसभा में साध्वी चारित्रकला ने जैन धर्म में गुरु एवं धर्मग्रंथों की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि जैन आगम और धर्मग्रंथ मानव जीवन को सही दिशा देने वाले ज्ञान के भंडार हैं। इनमें वर्णित सिद्धांत सत्य, तर्कसंगत और आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।


साध्वी ने कहा कि श्रद्धा से इन ग्रंथों का अध्ययन या श्रवण करने पर व्यक्ति का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल सकता है। साध्वी चारित्रकला ने बताया कि मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, जबकि वास्तविक शांति धर्मग्रंथों के अध्ययन तथा गुरु के सान्निध्य से मिलती है। गुरु आत्मा को सत्य, संयम और मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु की आज्ञा का अनुसरण करने वाला व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों से मुक्त होकर आत्मोन्नति की ओर बढ़ता है। प्रवचन में साध्वी चारित्रकला ने एक प्राचीन जैन ग्रंथ का प्रेरक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे एक आचार्य ने जीवन में हुई हत्याओं का कठोर प्रायश्चित किया। तप, त्याग और आत्मचिंतन से उन्होंने कर्मों का क्षय कर महत्त्वपूर्ण धर्मग्रंथों की रचना की। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्चा पश्चाताप, आत्मशुद्धि और धर्म के प्रति अटूट समर्पण व्यक्ति को महान बनाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रतिदिन स्वाध्याय और गुरु वचनों के मनन के लिए समय निकालने का आह्वान किया।

Updated on:
01 Aug 2026 06:01 am
Published on:
01 Aug 2026 06:01 am