मध्यप्रदेश के रतलाम में कोरोना वायरस के दौरान टोटल लॉकडाउन है। इस बीच सब्जी, दूध व फल आदि सहजता से मिल रहा है। सोमवार को कलेक्टर ने निर्णय लेते हुए होम डिलेवरी के माध्यम से जूते की दुकानें खोलने की मंजूरी दी, लेकिन सोशल मीडिया पर कलेक्टर के इस निर्णय का जमकर विरोध हुआ। इसके बाद प्रशासन ने आमजन की भावना का सम्मान करते हुए अपने निर्णय को वापस ले लिया है।
रतलाम. मध्यप्रदेश के रतलाम में कोरोना वायरस के दौरान टोटल लॉकडाउन है। इस बीच सब्जी, दूध व फल आदि सहजता से मिल रहा है। सोमवार को कलेक्टर ने निर्णय लेते हुए होम डिलेवरी के माध्यम से जूते की दुकानें खोलने की मंजूरी दी, लेकिन सोशल मीडिया पर कलेक्टर के इस निर्णय का जमकर विरोध हुआ। इसके बाद प्रशासन ने आमजन की भावना का सम्मान करते हुए अपने निर्णय को वापस ले लिया है।
यह दुकान खुलेगी सिर्फ अब
प्रशासन ने जो ताजा आदेश जारी किए है उसके अनुसार बताया गया है कि 27 अप्रैल के आदेश में जिला प्रशासन रतलाम द्वारा नगरीय निकायों में जूतों की दुकानों तथा स्टेशनरी की दुकानों से होम डिलीवरी अनुमत की गई थी। इस आदेश को संशोधित किया जाता है । यह अनुमति अब मात्र स्टेशनरी / पुस्तक की दुकानों के लिए रहेगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिकल एप्लायंस की होम डिलीवरी तथा घर घर जाकर मैकेनिक द्वारा मरम्मत कार्य किया जा सकेगा। इतना ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रो में यथावत , सुबह 7 से दोपहर 1 बजे तक उपरोक्त तीनो प्रकार की दुकानें ग्रामीण ग्राहकों के लिए खुलेंगी।
इसलिए आया प्रशासन बैकफुट पर
असल में कलेक्टर रूचिका चौहान के आदेश जूते की दुकाने खोलने व होम डिलेवरी के आदेश के पीछे तर्क दिया गया था कि ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा सहित अन्य रोजगार मजदूरों के लिए शुरू कर दिए गए है। उनको नए जूते की जरुरत है। इस बात का जमकर हास्य किया गया। आमजन ने सोशल मीडिया पर ही सवाल उठा दिए जब इतने दिन से सभी घर में है तो जूते की जरुरत क्यों हो गई। इसके बाद जब यह अभियान चल गया तो प्रशासन को अपना आदेश वापस लेना पड़ा। शुरू में जब विरोध हुआ तो कलेक्टर ने वॉइस मैसेज जारी करके इसको खोलने की जरुरत के बारे में बताया, लेकिन आमजन संतुष्ठ नहीं हुए, इसके बाद इस निर्णय को अब वापस ले लिया गया है।