
नई दिल्ली। सरकार कंपनी कानून की धारा 250 के तहत मुखौटा कंपनियों पर और ज्यादा सख्ती करने जा रही है। अब ऐसी कंपनियों की रियल एस्टेट संपत्तियां प्राधिकरण की जांच के दायरे में होंगी। ऐसी कंपनियों द्वारा अपनी संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण किए जाने पर भी रोक लगाई जाएगी। केंद्र सरकार ने राज्यों से ऐसी कंपनियों द्वारा अपनी संपत्ति बेचने और हस्तांतरित करने पर रोक लगाने को कहा।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे मुखौटा कंपनियों की संपत्तियों की पहचान करें और संबंधित जिलाधिकारी उसे अपने कब्जे में ले लें। इसके लिए च्राज्यों से कहा गया है कि वे ऐसी संपत्तियों की बिक्री, हस्तांतरण पर रोक लगाने के आदेश जारी करें और जिलाधिकारियों को ऐसी रियल एस्टेट संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने को कहें।
कंपनी मामलों के मंत्रालय ने कहा है कि मुखौटा या कंपनियों के पास उनके मुख्यालय से इतर अन्य भी राज्यों में अचल संपत्तियां और बैंक खाते हैं। मंत्रालय ने अधिकारियों से संबंधित राज्यों में मुखौटा कंपनियों के बैंक खातों की पहचान करने और जरूरी कार्रवाई करने को कहा है।
मंत्रालय ने इन बैंकों से कहा है कि उनकी ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी में कुछ विसंगतियां हैं, इसलिए उसे फिर से भेजा जाए। एक मामले में मंत्रालय ने पाया कि नोटबंदी के दौरान ४० करोड़ की हेराफेरी किया गया।
2 लाख कंपनियों के खाते जब्त
मंत्रालय पहले ही 2 लाख मुखौटा कंपनियों के खाते जब्त कर चुकी है। कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 50,818 मुखौटा कंपनियों पर कंपनी पंजीयक ने रोक लगाई है। इसके बाद दिल्ली की 44,178 और तमिलनाडु की 20,739 कंपनियां हैं।
कुल अवैध धन का 10 फीसदी हिस्सा
अर्थव्यवस्था में कुल अवैध धन का केवल 10 फीसदी हिस्सा शेल कंपनियों के पास ही है। गौरतलब है कि नोटबंदी के दौरान इन कंपनियों द्वारा 10,000 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया था।