
jaipur airport
जयपुर। टोंक रोड, शिवदासपुरा में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव फिर फाइल से बाहर आ गया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद जेडीए अवाप्ति का प्रस्ताव तैयार करने में जुट गया है, जिसे जल्द ही नगरीय विकास विभाग को भेजा जाएगा। इससे प्रभावित गांवों में हलचल मच गई है। इसमें २० गांवों की २१००.०८ हैक्टेयर जमीन प्रभावित है।
इसमें स्पेशल एरिया में उन ८ गांवों की ४६५१ बीघा जमीन भी शामिल है, जिसे वर्ष २००८ में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए रिजर्व किया गया था। राज्य सरकार पहले ही सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है। सूत्रों के मुताबिक ‘सरकार’ ने विशेष रूप से इसकी प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा है।
पिसते रहे प्रभावित
पिछले 9 साल में भाजपा के अलावा कांग्रेस सरकार भी रही लेकिन किसी ने इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं की। प्रभावित काश्तकार-खातेदार और जनप्रतिनिधियों ने कई बार सरकार को पत्र लिख स्थिति स्पष्ट करने कहा, नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा। करीब 3 वर्ष पहले मामला फिर गर्माया। नगरीय विकास विभाग ने जेडीए से रिपोर्ट मांगी। जेडीए ने प्रस्ताव को खत्म करने की जरूरत बताते हुए सरकार को पत्र भेजा पर हुआ कुछ नहीं।
निकटतम एयरपोर्ट से कम दूरी कारण
चर्चा यह भी है कि चिन्हित भूमि के अलावा और जमीन भी ली जा सकती है। कारण, एक एयरपोर्ट से दूसरे एयरपोर्ट के बीच की दूरी १५० किलोमीटर होने की बाध्यता (स्पेशल केस को छोडक़र) है। जबकि मौजूदा एयरपोर्ट और प्रस्तावित जगह के बीच महज १५ से १७ किलोमीटर दूरी है। ऐसे में ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट की दूरी कुछ और बढ़ सकती है। इस मामले में नगरीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव मुकेश शर्मा, जेडीसी व अन्य अधिकारियों के बीच मंथन हो चुका है।
06 किमी लम्बाई प्रस्तावित हवाई पट्टी की
जवाब मांगते सवाल
जेडीए ने १९ मई, २०१५ को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट, ऐरोमेट्रोपॉलिस बनाने का प्रस्ताव भेजा, क्लीयरेंस मांगी। प्राधिकरण ने २४ अगस्त, २०१५ को जेडीए को जवाब भेजा, जिसमें ग्रीनफील्ड (नया) एयरपोर्ट पॉलिसी के तहत मौजूदा एयरपोर्ट से १५० किलोमीटर के भीतर दूसरे ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट निर्माण की सामान्यतया अनुमति नहीं देने के नियम गिना दिए। इसके बाद भी आवेदन नागर विमानन मंत्रालय को परीक्षा तथा सैद्धांतिक मंजूरी के लिए भेजने के लिए कह दिया।
- एयरपोर्ट अॅथोरिटी की क्लीयरेंस से पहले ही अवाप्ति प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है। इसका सीधा असर स्थानीय आबादी पर पड़ेगा।
- नियमों के तहत दो एयरपोर्ट के बीच की दूरी १५० किलोमीटर है तो फिर प्रस्ताव भेजने का क्या औचित्य।
- अगर सरकार की मंशा मौजूदा और प्रस्तावित एयरपोर्ट पर अलग-अलग डोमेस्टिक व इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की है तो वह साफ क्यों नहीं की जा रही।
- मौजूदा एयरपोर्ट पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्तर की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। रेनवे की लम्बाई बढ़ाने का काम चल रहा है।
भू-रूपांतरण पर रोक, पर निर्माण होते गए
एयरपोर्ट बनाने का मसौदा ९ साल से चल रहा है। पहले प्रभावित गांवों की संख्या १२ थी, लेकिन बाद में यह बढक़र २० हो गई। इन गांवों में कई आवासीय योजनाएं विकसित हो चुकी हैं और इनमें से दो दर्जन से ज्यादा योजनाओं को खुद जेडीए अनुमोदित कर चुका है।
बताया जा रहा है कि चिन्हित २१०० हैक्टर जमीन में से ३० से ४० फीसदी भूमि पर घनी आबादी है। यहां कई स्कूल, अस्पताल तक संचालित हैं। जेडीए ने यहां भू- रूपांतरण (९०ए) पर अघोषित रोक लगा दी थी। एेसी स्थिति में न केवल मंदी में घिरा प्रोपर्टी बाजार पूरी तरह ठप हो गया।
किन गांवों में कितनी जमीन
ग्राम - अवाप्ताधीन भूमि (हैक्टेयर)
चन्दलाई - ७९.२६
शिवदासपुरा - १७२.२५
बरखेड़ा - ५५८.२५
गोपीरामपुरा - २२९.०६
लक्ष्मीपुरा काठावाला - २.७६
बिहारीपुरा - २३.५६
झुझारपुरा - ३७.३०
यारलीपुरा - १०१.२८
बाड़ापदमपुरा - १३३.१४
रायपुरिया खुर्द - २२३.७५
पाचुण्डा - ०.३३
भवानीपुरा - १४.९७
जयलालपुरा - ८८.१३
बल्लूपुरा - १३८.५५
देवकीनंदनपुरा - ०.४७
खाजलपुरा - ३.४४
नांगलपुरा - १५९.३७
धर्मपुरा - ५८.९५
हनुमानपुरा (बराला) - ७३.११
चक शिवदासपुरा - २.३७
Published on:
31 Oct 2017 01:26 pm
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