GST में कटौती के बावजूद सस्ते घरों की उम्मीद नहीं की जा रही हैं। इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित रियल एस्टेट सेक्टर ने चिंता जताई है। अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए, तो आम ग्राहक को सस्ते मकान दिलाने की कोशिशें रंग नहीं लाएंगी।
नई दिल्ली। बीते दिनों वित्त मंत्रियों ने निर्माणाधीन घरों पर जीएसटी कम करने के बारे में चर्चा की थी। बैठक में फैसला लिया गया कि निर्माणाधीन घरों पर GST दर में 5 फीसदी की कटौती की जाए और किफायती आवास परियोजनाओं पर 8 फीसदी से GST की दर को घटाकर 3 फीसदी कर दिया जाए। लेकिन अंडरकंस्ट्रक्शन मकानों पर जीएसटी की दरों में भारी कटौती के बावजूद इनकी कीमतों में बहुत ज्यादा गिरावट की उम्मीद नहीं की जा रही है।
सेक्टर ने जताई चिंता
आपको बता दें कि इनपुट टैक्स क्रेडिट से वंचित रियल एस्टेट सेक्टर ने सीमेंट और स्टील जैसे इनपुट मटीरियल पर जीएसटी की ऊंची दरों पर चिंता जताई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स और इंडस्ट्री की ओर से रियल एस्टेट में इनपुट क्रेडिट की विसंगतियों पर गुरुवार को आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में इंडस्ट्री ने शीर्ष अधिकारियों से कहा कि अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए, तो आम ग्राहक को सस्ते मकान दिलाने की कोशिशें रंग नहीं लाएंगी।
लागत के सबसे बड़े हिस्से पर 28 फीसदी GST
उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि लागत के सबसे बड़े हिस्से सीमेंट पर जीएसटी रेट 28 फीसदी है इसलिए क्रेडिट ना मिलने पर बिल्डर इसका बोझ ग्राहक पर डालेंगे। इतना ही नहीं, मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा पर भी सवाल उठाए गए हैं और कहा गया है कि दिल्ली-मुंबई में 45 लाख में 60 वर्गमीटर तक मकान देना मुश्किल है।
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