
Ashadha Gupt Navratri Date- शक्ति उपासना का पर्व आषाढ़ गुप्त नवरात्र इस वर्ष 15 से 23 जुलाई तक श्रद्धा, साधना और सात्विक नियमों के साथ मनाया जाएगा। चैत्र और शारदीय नवरात्र के बजाय इसमें सार्वजनिक आयोजन कम होते हैं। जबकि साधक, तांत्रिक और श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की विशेष साधना करते है। इस बार नवरात्र की शुरुआत बुधवार से होने के कारण मां दुर्गा का आगमन नौका पर माना जा रहा है, जिसे शुभ और कल्याणकारी संकेत माना गया है।
ज्योतिर्विद सौरभ दुबे के अनुसार, नवरात्र जिस वार से शुरू होती है, उसी के आधार पर माता के वाहन का का निर्धारण होता है। बुधवार से शुरुआत होने पर माता नौका पर सवार होकर आती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार यह वाहन अच्छी वर्षा, समृद्धि और कृषि में उन्नति का प्रतीक है। कृषि प्रधान महाकौशल अंचल के लिए इसे विशेष रूप से शुभमाना जा रहा है। मान्यता है कि माता का नौका पर आगमन भक्तों के कष्ट दूर करने के साथ खुशहाली का संदेश देता है।
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा 14 जुलाई को दोपहर 3.14 बजे शुरू होकर 15 जुलाई को सुबह 11.52 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 15 जुलाई से गुप्त नवरात्र का आरंभ माना जाएगा। पहले दिन पुष्य नक्षत्र में घटस्थापना होगी। सुबह 8:02 बजे हर्षण योग में कलश स्थापना का सर्वोत्तम मुहूर्त रहेगा। इसके बाद वज्र योग प्रारंभ होगा। हर्षण योग में किए गए अनुष्ठान को सुख, आनंद और मनोकामना पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, प्रतिपदा की उदया तिथि, पुष्य नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग इस बार गुप्त नवरात्र को अत्यंत प्रभावशाली बना रहा है। यह अवधि तंत्र-मंत्र, साधना, आध्यात्मिक अनुष्ठान और मानसिक तनाव से मुक्ति के लिए भी विशेष फलदायी मानी गई है।
गुप्त नवरात्र के दौरान नर्मदा तट के प्राचीन मठों, भेड़ाघाट के चौसठ योगिनी मंदिर, गौरीघाट, बाजनामठ और मदन महल स्थित शारदा देवी मंदिर सहित प्रमुख सिद्धपीठों में विशेष पूजन-अनुष्ठान होंगे। नौ दिन तक मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी और बगलामुखी समेत दस महाविद्याओं की साधना की जाएगी। पर्व का समापन 23 जुलाई को नवमी के हवन और पूर्णाहुति के साथ होगा।