धर्म और अध्यात्म

Premanand Maharaj से मिले नागालैंड के गवर्नर, मिला उपदेश- देह के बाद आपके कर्म ही रहेंगे साथ

Premanand Maharaj Motivational Speech: वृंदावन में Premanand Maharaj से मिले नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव। संत ने कहा- मृत्यु के बाद व्यक्ति के साथ केवल उसके कर्म ही जाते हैं।
2 min read
May 12, 2026
Premanand Maharaj Vrindavan meeting
Nandkishore Yadav Vrindavan Visit News|Chatgpt

Premanand Maharaj Governor Nand Kishore: नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने 11 मई 2026 सोमवार को वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान प्रेमानंद महाराज ने उन्हें जीवन और कर्म का महत्व समझाते हुए कहा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के साथ केवल उसके कर्म ही जाते हैं। दोनों के बीच धर्म, भक्ति और मानव जीवन के उद्देश्य को लेकर चर्चा हुई, जिसे सुनकर मौजूद श्रद्धालु भी प्रभावित नजर आए। उनकी बातें न केवल आध्यात्मिक थीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा भी थीं।

ठाकुरजी का नामजप को बताया जीवन का आधार

प्रेमानंद महाराज ने राज्यपाल को सलाह दी कि हर व्यक्ति को दिन के 24 घंटे में कम से कम 24 मिनट भगवान के नाम का जाप अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य बाहरी सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, लेकिन सच्चा सुख केवल प्रभु स्मरण में है। ठाकुरजी का नामजप मन को शांति देता है और जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।

"मृत्यु के बाद केवल कर्म ही रहते हैं साथ "- प्रेमानंद महाराज

महाराज जी ने अपने सरल लेकिन प्रभावशाली शब्दों में कहा कि यह शरीर नश्वर है। एक दिन पद, प्रतिष्ठा, धन और सांसारिक सुख सब यहीं छूट जाएंगे। मृत्यु के बाद यदि कुछ साथ जाता है, तो वह केवल व्यक्ति के कर्म होते हैं। अच्छे कर्म आत्मा को ऊंचाई देते हैं, जबकि बुरे कर्म जीवन को दुखों की ओर ले जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व जन्मों के पुण्यों के कारण मनुष्य को यह दुर्लभ मानव जीवन मिलता है। इसलिए इस जीवन का उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि समाज सेवा, मानवता और भगवान की भक्ति होना चाहिए।

Governor Nand Kishore: राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने मंदिरों में किए दर्शन और पूजा

राज्यपाल नंदकिशोर यादव ने वृंदावन प्रवास के दौरान श्री बांके बिहारी मंदिर, श्री राधारमण मंदिर और निधिवन में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। मंदिरों के सेवायतों ने उन्हें प्रसादी माला, पटका और भोग भेंट कर सम्मानित किया।

Updated on:
12 May 2026 12:57 pm
Published on:
12 May 2026 10:47 am