धर्म और अध्यात्म

119 दिन सोएंगे भगवान विष्णु, चातुर्मास में आएंगे 20 बड़े त्यौहार, जानें इस दौरान क्या रखें ध्यान

Devshayani Ekadashi 2026- जानिए 119 दिनों के इस विशेष काल में कौन-कौन से बड़े त्योहार आएंगे, क्यों रखा जाता है सात्विक आहार का नियम और बारिश के मौसम में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान।
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Updated: 10 Jul 2026, 2:18 PM IST
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Devshayani Ekadashi 2026-चार महीने के लिए सोएंगे भगवान विष्णु, चातुर्मास आएंगे 20 बड़े पर्व (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Chaturmas 2026- देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) के साथ 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी। परंपरा अनुसार चार माह तक सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करेंगे और श्रद्धालु त्योहार मनाएंगे। 119 दिनों के इस विश्राम काल में 20 बड़े पर्व है। इस साल अधिकमास के कारण तीज त्योहार एक पखवाड़ा देरी से आएंगे। संत, महंत और विशेषज्ञों का कहना है कि यह चार माह पर्व मनाने, साधना, आराधना, जप, तप करने के साथ-साथ संयमित जीवन जीने और आहार विहार की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में वर्षाकाल में खान पान पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

चातुर्मास का विशेष महत्व

यह समय केवल जप, तप और पूजा-अर्चना जैसी धार्मिक आराधनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संयमित और अनुशासित जीवनशैली अपनाने का भी महापर्व है। ऋतु परिवर्तन के इस दौर में ऋषियों-मुनियों ने खान-पान व दिनचर्या को लेकर वैज्ञानिक नियम बनाए है। चातुर्मास के दौरान सात्विक आहार व विहार का पालन करने से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य उत्तम रहता है, बल्कि मानसिक विकारों से भी मुक्ति मिलती है।

आहार शुद्धि का समय होता है चातुर्मास

पं. रामनारायण आचार्य का कहना है कि चातुर्मास साधु संतों के साथ-साथ गृहस्थों के लिए भी संयमित जीवनशैली का समय होता है। जप-तप के साथ-साथ सात्विक भोजन, अल्पाहर, व्रत उपवास इसमें अत्यंत लाभकारी होते हैं। पर्यावरण की दृष्टि से साधुओं का चातुर्मास महत्वपूर्ण है। 4 माह तक साधू संत किसी जीव की हत्या, किसी वनस्थिति पर उनका पैर न पड़े, इससे बचने के लिए एक ही स्थान पर रहकर भजन पूजन करते हैं।

सितंबर और अक्टूबर में अधिक पर्व

इस बार सितंबर और अक्टूबर में अधिक पर्व रहेंगे। अगस्त के आखिरी में रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इसी प्रकार सितंबर में जन्माष्टमी, गणेश उत्सव जैसे त्योहारा रहेंगे तो अक्टूबर माह में शारदीय नवरात्र, वशहरा, शरद पूर्णिमा जैसे पर्व आएंगे। इसी प्रकार नवंबर में विवाली रहेगी। पिछले साल की तुलना में इस बार विवाली पर्व एक पखवाड़ा देरी से रहेगा।

वर्षा ऋतु में बैक्टिरिया से बचाव जरूरी

आयुर्वेद और एमबीबीएस चिकित्सक डॉ. दीपक मेहता का कहना है कि चातुर्मास में एक साईंटिफिक कारण भी होता है वर्षाऋतु में खान पान पर ध्यान देने की विशेष जरूरत होती है. इस समय पर्यावरण, भोजन, जल में कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया की तादात बढ़ जाती है, इससे पाचन शक्ति मंद पड़ जाती है, ऐसे में शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए शुद्धि, शाकाहारी, सात्विक भोजन, जरूरी है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। वर्षाकाल में उबला हुआ पानी पीना चाहिए, बाहर की चीजों से परहेज करना चाहिए, खुली और बांसी खाद्य सामग्री नहीं खानी चाहिए

चातुर्मास के प्रमुख त्योहार

16 जुलाई -जगन्नाथ रथयात्रा
25 जुलाई- देवशयनी एकादशी
29 जुलाई- गुरु पूर्णिमा
30 जुलाई- सावन माह शुरुआत
28 अगस्त- रक्षाबंधन
4 सितंबर- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
14 सितंबर - गणेश चतुर्थी
11 अक्टूबर- नवरात्र आरंभ
20 अक्टूबर- विजयादशमी
25 अक्टूबर- शरद पूर्णिमा
8 नवंबर- दीपावली
20 नवंबर- देवउठनी एकादशी

Updated on:
10 Jul 2026, 2:18 PM IST
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