धर्म और अध्यात्म

एकादशी पर क्यों नहीं खाना चाहिए चावल? ज्योतिषाचार्य से जानिए इसका कारण और धार्मिक महत्व

Devshayani Ekadashi 2026- एकादशी व्रत में चावल खाने से क्यों मना किया जाता है? इसके पीछे महर्षि मेधा की कथा और ज्योतिषीय कारण बताए जाते हैं। जानिए एकादशी के जरूरी नियम।
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Jul 21, 2026
Devshayani Ekadashi Rice Eating Rule chaturmas puja vidhi
Devshayani Ekadashi 2026- कादशी पर क्यों नहीं खाना चाहिए चावल? ज्योतिषाचार्य से जानिए (फोटो सोर्स- Chatgpt)

Ekadashi Rice Eating Rule: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi 2026) मनाई जाती हैं। इस वर्ष 25 जुलाई को यह एकादशी पड़ रही है। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी संग चार माह की योग निद्रा में जाते हैं। ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा के अनुसार एकादशी में चावल नही खाने का धार्मिक और ज्योतिष महत्व है। आइए जानते है कि एकादशी के दिन क्यों न खाएं चावल, खान-पान में कैसे रखे ध्यान?

एकादशी में चावल न खाने का धार्मिक महत्व

नीतिका शर्मा बताती है कि पौराणिक मान्यता के अनुसार माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए महर्षि मेधा ने शरीर का त्याग कर दिया और उनका अंश पृथ्वी में समा गया। चावल और जौ के रूप में महर्षि मेधा उत्पन्न हुए, इसलिए चावल और जौ को जीव माना जाता है। जिस दिन महर्षि मेधा का अंश पृथ्वी में समाया, उस दिन एकादशी तिथि थी, इसलिए इनको जीव रूप मानते हुए एकादशी को भोजन के रूप में ग्रहण करने से परहेज किया गया है, ताकि सात्विक रूप से विष्णु प्रिया एकादशी का व्रत संपन्न हो सके।

चावल न खाने का ज्योतिषीय कारण

एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय कारण भी है। ज्योतिष के अनुसार चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है। जल पर चन्द्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। ऐसे में चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है और इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है।

खान-पान का रखें विशेष ध्यान

चातुर्मास की शुरुआत में बारिश का मौसम रहता है। इस कारण बादलों की वजह से सूर्य की रोशनी हम तक नहीं पहुंच पाती है। सूर्य की रोशनी के बिना हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में खान-पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। खाने में ऐसी चीजें शामिल करें जो सुपाच्य हों। वरना पेट संबंधित बीमारियां हो सकती है।

चातुर्मास में इस प्रकार करें पूजा

सावन में भगवान शिव-शक्ति की पूजा की जाती है। इससे सौभाग्य बढ़ता है। भादौ में गणेश और श्रीकृष्ण की पूजा से हर तरह के दोष खत्म होते हैं। अश्विन मास में पितर और देवी की आराधना का विधान है। इन दिनों पितृ पक्ष में नियम-संयम से रहने और नवरात्रि में व्रत करने से सेहत अच्छी होती है। वहीं, कार्तिक महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने की परंपरा है। इससे सुख और समृद्धि बढ़ती है। इन चार महीनों में आने वाले व्रत, पर्व और त्योहारों की वजह से ही चातुर्मास को बहुत खास माना गया है।

Updated on:
21 Jul 2026 01:15 pm
Published on:
21 Jul 2026 01:15 pm