आपको बता दें इस बार 15 दिसंबर को शुक्रवार है इस शुक्र को प्रदोष का योग बन रहा है।
नई दिल्ली। हम जैसी कल्पना और विचार करते हैं, वैसे ही हो जाते हैं। शिव ने इस आधार पर ध्यान की कई विधियों का विकास किया। भगवान शिव दुनिया के सभी धर्मों का मूल हैं। शिव के दर्शन और जीवन की कहानी दुनिया के हर धर्म और उनके ग्रंथों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। भगवान भोले नाथ अपने भक्तों को प्रत्येक सुख प्रदान करते हैं। हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथियों के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है। एस व्रत से अलग-अलग फल प्राप्त होते हैं। आपको बता दें इस बार 15 दिसंबर को शुक्रवार है इस शुक्र को प्रदोष का योग बन रहा है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन शुक्र प्रदोष व्रत पूरी विधि विधान के साथ रखना चाहिए।
शुक्र प्रदोष करने की यह विधियाँ अपनाएं...
- यह सत्य है प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है।
- प्रातः काल स्नान करके भगवान शिव, पार्वती और नंदी को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र, गंध, चावल, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग व इलायची चढ़ाएं। पूजा में चमेली का फूल चढ़ाएं।
- सांझ काल को फिर स्नान करके इसी इसी प्रकार शकर जी की सोलह सामग्रियों से पूजा-अर्चना करें।
- भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग अवश्य लगाएं।
-आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें।
-भगवान शिव को जूही, कनेर, धतूर, हरसिंगार, के फूल अति प्रिय हैं और इन्हें शिव को अर्पित करने के अपने-अपने महत्व हैं।
-शिव स्त्रोत, मंत्र जाप करें। रात्रि में जागरण करें।
-इस प्रकार आपकी सारी मनोकनाएं पूर्ण होंगी और कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
-व्रत रखने वाला प्रदोष व्रत के धार्मिक विधान, नियम और संयम से पालन करे।