धर्म और अध्यात्म

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर दर्शन का दुर्लभ अवसर, जयपुर का वह चमत्कारी शिवालय जहां टिक नहीं पाती शिव परिवार की मूर्तियां

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व जैसे ही नजदीक आता है, भक्तों के मन में भगवान भोलेनाथ के दर्शनों की तीव्र इच्छा जाग उठती है। जयपुर में भी एक ऐसा ही शिवालय है, जिसके दर्शन साल भर में केवल एक दिन महाशिवरात्रि को ही आम श्रद्धालुओं के लिए संभव होते हैं। यही विशेषता इसे और भी रहस्यमय और आकर्षक बना देती है।
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Feb 14, 2026
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Famous Shiv Temple in Jaipur|फोटो सोर्स- Freepik

Mahashivratri 2026:महाशिवरात्रि का पर्व आते ही देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है, लेकिन जयपुर में स्थित एक ऐसा चमत्कारी शिव मंदिर भी है, जो साल में सिर्फ एक बार महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालुओं के लिए अपने द्वार खोलता है। इस मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात यह है कि यहां शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित नहीं हो पातीं, मान्यता है कि वे अदृश्य हो जाती हैं या टिकती ही नहीं।इसी अनोखी परंपरा और आस्था के कारण यह शिवालय श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महाशिवरात्रि के दिन यहां जलाभिषेक और दर्शन को बेहद पुण्यदायी माना जाता है, जिससे भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

मोती डूंगरी की पहाड़ी पर स्थित प्राचीन शिवधाम

जयपुर की मोती डूंगरी पहाड़ी पर विराजमान एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर को शंकरगढ़ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर जयपुर शहर की स्थापना से भी पहले का है। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार इसका संबंध सवाई जय सिंह द्वितीय के काल से जोड़ा जाता है।पहाड़ी के नीचे स्थित भव्य बिड़ला मंदिर और प्रसिद्ध मोती डूंगरी गणेश मंदिर के साथ यह स्थान एक आध्यात्मिक त्रिवेणी जैसा प्रतीत होता है। एक ही परिसर में तीन प्रमुख मंदिर होने से श्रद्धालुओं की भीड़ महाशिवरात्रि से एक दिन पहले ही उमड़ने लगती है।

राजपरिवार की आस्था से जुड़ा इतिहास

कहा जाता है कि जयपुर के राजपरिवार का इस मंदिर से विशेष लगाव रहा है। सावन के महीने में यहां सहस्त्रघट रुद्राभिषेक जैसे भव्य अनुष्ठान आयोजित किए जाते थे।एक प्रचलित कथा के अनुसार, सवाई जय सिंह के छोटे पुत्र माधो सिंह के ननिहाल में एकलिंगेश्वर महादेव का मंदिर था। उसी आस्था से प्रेरित होकर यहां भी भगवान शिव का मंदिर स्थापित करवाया गया। इसी कारण इस क्षेत्र को शंकरगढ़ नाम मिला।

क्यों नहीं टिक पाती शिव परिवार की मूर्तियां?

इस मंदिर की सबसे रहस्यमयी बात इससे जुड़ी किंवदंती है। कहा जाता है कि मंदिर निर्माण के बाद यहां भगवान शिव के साथ पूरा शिव परिवार विराजमान किया गया था।लेकिन स्थापना के कुछ समय बाद ही शिव परिवार की मूर्तियां अचानक लुप्त हो गईं। दोबारा स्थापना की गई, पर दूसरी बार भी वही घटना दोहराई गई।इन घटनाओं को किसी अलौकिक संकेत के रूप में देखा गया। तब से भय और श्रद्धा के मिश्रित भाव के चलते यहां पुनः शिव परिवार की मूर्तियां स्थापित नहीं की गईं। वर्तमान में यहां केवल शिवलिंग की पूजा की जाती है।यह रहस्य आज भी लोगों की जिज्ञासा को बढ़ाता है और महाशिवरात्रि के दिन यहां दर्शन करना एक दुर्लभ अनुभव माना जाता है।

महाशिवरात्रि पर विशेष अवसर

यह मंदिर आम श्रद्धालुओं के लिए वर्ष में केवल महाशिवरात्रि के दिन खुलता है। उस दिन सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। पहाड़ी पर चढ़ते हुए ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।जो लोग इस दिन दर्शन कर पाते हैं, वे इसे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।

Updated on:
14 Feb 2026 12:21 pm
Published on:
14 Feb 2026 12:18 pm