
Malmas 2026 Date , Purushottam Maas 2026, Adhik Maas 2026 : क्या आप जानते हैं कि साल 2026 हमारी भक्ति और पूजा-पाठ के लिहाज से बेहद खास होने वाला है? इस साल अधिक मास लगने जा रहा है, जिसे हम पुरुषोत्तम मास (Purushottam Maas 2026) या मलमास के नाम से भी जानते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर तीसरे साल में आने वाला यह महीना भगवान विष्णु (श्री हरि) को अत्यंत प्रिय है।
अगर आप भी इस दौरान कोई नया व्रत शुरू करने या किसी अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए बहुत जरूरी है। आइए जानते हैं साल 2026 के अधिक मास का पूरा शेड्यूल और इससे जुड़ी रोचक बातें।
संवत 2083 (साल 2026) में ज्येष्ठ का महीना अधिक मास होगा। खास बात यह है कि इस साल 'रौद्र' नामक संवत्सर रहेगा, जो सभी पंचांगों में एक समान मान्य होगा।
| चरण / अवधि | पक्ष (Paksha) | तिथि (Dates) |
|---|---|---|
| शुद्ध ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष | 2 मई – 16 मई 2026 |
| अधिक मास का आरंभ | - | 17 मई 2026 |
| अधिक ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष | 17 मई – 31 मई 2026 |
| अधिक ज्येष्ठ | कृष्ण पक्ष | 1 जून – 15 जून 2026 |
| अधिक मास का समापन | - | 15 जून 2026 |
| शुद्ध ज्येष्ठ | शुक्ल पक्ष | 16 जून – 29 जून 2026 |
ध्यान दें: अधिक मास में पहले शुक्ल पक्ष आता है और उसके बाद कृष्ण पक्ष आता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब इस महीने को 'मलमास' कहकर तिरस्कृत किया गया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम पुरुषोत्तम दिया। इस महीने में किए गए दान-पुण्य का फल अन्य महीनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है।
इस मास में कांसे के पात्र में 33 मालपुए (अपूप) रखकर ब्राह्मण को दान करने का विधान है। यह दान भगवान नारायण के 33 नामों के साथ किया जाता है, जिससे पितरों को शांति मिलती है।
पवित्र नदियों में स्नान और पुरुषोत्तम मास की कथा का श्रवण करना मोक्षदायक माना जाता है।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का निरंतर जाप करना अत्यंत शुभ होता है।
अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं कि क्या अधिक मास में शुभ कार्य किए जा सकते हैं? निर्णय सिंधु ग्रंथ के अनुसार:
नया व्रत शुरू न करें: यदि आप कोई नया मासिक या साप्ताहिक व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं, तो रुक जाएं। अधिक मास में नया संकल्प वर्जित है।
उद्यापन की मनाही: पहले से चले आ रहे किसी व्रत का उद्यापन भी इस महीने में नहीं करना चाहिए।
मांगलिक कार्य: विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और जनेऊ जैसे संस्कार इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं क्योंकि इस समय को 'मलिन' मास कहा जाता है।
साल 2026 का यह पुरुषोत्तम मास आध्यात्मिक शुद्धि का समय है। भले ही इसमें भौतिक मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन आत्म-कल्याण और ईश्वर की भक्ति के लिए इससे उत्तम समय कोई दूसरा नहीं है।
अगर आप अपने जीवन के संकटों से मुक्ति और पितृ दोष से राहत चाहते हैं, तो 17 मई से 15 जून 2026 के बीच भगवान नारायण की शरण में जरूर रहें।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।