Shiv Parvati Vivah Katha : शिव और पार्वती के विवाह की अनसुनी कथा जानिए। महादेव की बारात, त्रियुगीनारायण मंदिर, मीनाक्षी विवाह और महाशिवरात्रि का रहस्य।
Untold Story of Shiv Parvati Marriage : क्या आपने कभी सोचा है कि जिस देव ने श्मशान को अपना घर बनाया और सांपों को अपना गहना, उनका विवाह दुनिया का सबसे भव्य उत्सव कैसे बन गया? शिव और पार्वती की कहानी सिर्फ एक शादी नहीं, बल्कि दो आत्माओं के अटूट विश्वास और युगों-युगों के इंतजार की दास्तान है।
शिव की पहली पत्नी सती (दक्ष प्रजापति की पुत्री) ने अपने पिता द्वारा महादेव के अपमान से दुखी होकर यज्ञ की अग्नि में खुद को होम कर दिया था। इस वियोग में शिव इतने टूट गए कि वे सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे। अंततः भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 हिस्से किए (जो आज शक्तिपीठ कहलाते हैं), तब जाकर शिव गहरे ध्यान में लीन हुए।
सती ने पुनर्जन्म लिया पार्वती के रूप में, जो राजा हिमवान की बेटी थीं। शिव को फिर से पाने के लिए उन्होंने वो सब किया जो मुमकिन था। उन्होंने कामदेव की मदद ली, जिन्हें शिव ने अपनी तीसरी आंख से भस्म कर दिया। लेकिन पार्वती हार मानने वालों में से नहीं थीं। उन्होंने हजारों साल घोर तपस्या की।
एक रोचक किस्सा: विवाह से पहले शिव ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए एक अघोरी का रूप धरा। उन्होंने खुद (शिव) की ही बुराई की और पार्वती से कहा, "उस भस्म रमाने वाले से शादी क्यों करना चाहती हो?" पार्वती का अटल विश्वास देख शिव मुस्कुरा उठे और विवाह के लिए मान गए।
उत्तर भारतीय मान्यताओं के अनुसार, त्रियुगीनारायण मंदिर (उत्तराखंड) वह स्थान है जहाँ शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। कहते हैं, जब बारात पहुँची तो शिव के साथ भूत, प्रेत, पिशाच और नंदी थे। पार्वती की माता मैनावती तो दूल्हे का भयानक रूप देखकर बेहोश ही हो गई थीं! बाद में भगवान विष्णु ने हस्तक्षेप किया और शिव अपने सबसे सुंदर रूप 'सुंदरेश्वर' में प्रकट हुए।
दक्षिण भारत में इस विवाह के अलग और दिलचस्प रंग मिलते हैं:
मीनाक्षी-सुंदरेश्वर विवाह: मदुरै की राजकुमारी मीनाक्षी (जिनकी तीन आंखें थीं) जब शिव से मिलीं, तो उनकी तीसरी आंख गायब हो गई यही संकेत था कि उन्हें उनका जीवनसाथी मिल गया है। आज भी मदुरै में 'चितिरई उत्सव' में इस विवाह का भव्य जश्न मनाया जाता है।
तिरुमंजरी की कथा: कहते हैं कि एक बार श्राप के कारण पार्वती को गाय बनकर धरती पर आना पड़ा। बाद में शिव ने उनसे पुनर्मिलन किया। तमिलनाडु के तिरुमंजरी मंदिर में आज भी वो लोग दर्शन करने जाते हैं जिनकी शादी में बाधा आ रही हो।
काशी यात्रा की शुरुआत: क्या आप जानते हैं? दक्षिण भारतीय शादियों में 'काशी यात्रा' की रस्म (जहां दूल्हा संन्यास लेने का नाटक करता है) भगवान शिव से जुड़ी है। तिरुवीझिमिललाई मंदिर की कथा के अनुसार, शिव ने मज़ाक में कहा था कि अगर उन्हें पार्वती नहीं मिलीं, तो वे काशी जाकर संन्यासी बन जाएंगे।
शतरंज का खेल: पुवनूर के एक मंदिर की कहानी है कि शिव ने पार्वती को शतरंज के खेल में हराकर उनका हाथ मांगा था।
अमर ज्योति: त्रियुगीनारायण मंदिर में आज भी वह अग्नि जल रही है, जिसके फेरे शिव-पार्वती ने लिए थे। इसे 'अखंड धुनी' कहा जाता है।
महाशिवरात्रि का रहस्य: कई पुराणों के अनुसार, महाशिवरात्रि ही वह रात है जब शिव और शक्ति का मिलन हुआ था, जिसे हम आज भी बड़े उल्लास से मनाते हैं।
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