Pradeep Mishra Ke Upay, Maha Shivratri 2026: कथावाचक प्रदीप मिश्रा का मानना है कि महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मजागरण की रात है। वे अपने प्रवचनों में बताते हैं कि इस दिन की गई साधना व्यक्ति के भीतर छिपी ऊर्जा को जगाने का माध्यम बन सकती है।
Pradeep Mishra Ke Upay, Maha Shivratri 2026: साल 2026 की महाशिवरात्रि को बेहद खास संयोगों के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे शिव भक्तों के लिए वरदान समान माना जा रहा है। मान्यता है कि इस पावन रात में की गई सच्ची भक्ति और नियमपूर्वक साधना व्यक्ति के जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाओं को भी दूर कर सकती है। यह वही दिव्य अवसर है जब भगवान शिव और माता पार्वती के पावन मिलन का उत्सव मनाया जाता है और शिव कृपा पाने का मार्ग खुलता है।अगर करियर में रुकावटें आ रही हों, नौकरी में स्थिरता न मिल रही हो या विवाह में देरी हो रही हो, तो महाशिवरात्रि की रात की गई शिव आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए उपाय जीवन की दिशा बदल सकते हैं और भोलेनाथ स्वयं भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
महाशिवरात्रि पर कुछ सरल उपाय बताए जाते हैं, जिन्हें श्रद्धा से किया जाए तो मानसिक और आध्यात्मिक लाभ मिल सकता है।आर्थिक परेशानी से जूझ रहे लोग शिवलिंग पर 11 बेलपत्र अर्पित करें और “ॐ नमः शिवाय” का जप करें। कर्ज से राहत की कामना रखने वाले जल में काले तिल मिलाकर अभिषेक कर सकते हैं। मनोकामना पूर्ति के लिए दूध और शहद अर्पित करने की परंपरा है। विवाह में बाधा होने पर माता गौरी और भगवान शंकर की संयुक्त पूजा की जाती है। वहीं करियर में उन्नति के लिए गंगाजल अर्पित कर महामृत्युंजय मंत्र का जाप लाभकारी माना जाता है।
धार्मिक ग्रंथों जैसे Shiv Mahapuran में उल्लेख मिलता है कि इसी दिन भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए विषपान किया था। यही तिथि शिव और माता पार्वती के विवाह से भी जुड़ी मानी जाती है।साल 2026 की महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष बताया जा रहा है। 15 फरवरी 2026 को सूर्य, बुध और शुक्र का त्रिग्रही योग बन रहा है। साथ ही श्रवण नक्षत्र और कई शुभ योगों का संयोग इस दिन को और खास बना रहा है।मान्यता है कि ऐसे दुर्लभ योगों में की गई साधना का प्रभाव गहरा होता है।
वैदिक पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी 2026 को शाम 5:06 बजे प्रारंभ होगी और 16 फरवरी 2026 को सुबह 5:32 बजे समाप्त होगी। क्योंकि महाशिवरात्रि की पूजा, रुद्राभिषेक और रात्रि जागरण का विशेष महत्व निशीथ काल में होता है, इसलिए इस वर्ष यह पर्व 15 फरवरी 2026, रविवार की रात को ही श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाएगा। व्रत रखने और रातभर शिव साधना करने के लिए यही तिथि सबसे शुभ और फलदायी मानी गई है।