
Premanand ji Maharaj Pravachan Dusu President Aryan Maan: प्रेमानंद जी महाराज अपने बेबाक अंदाज और भक्ति मार्ग के प्रवचनों के लिए जाने जाते हैं। उनसे हाल ही, शराब कारोबारी के बेटे और दिल्ली विश्वविद्यालय (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान मिलने पहुंचे। प्रेमानंद जी ने आर्यन को नसीहत दी कि पारिवारिक शराब व्यवसाय के बावजूद वे स्वयं को नशे से दूर रखें। उन्होंने जोर दिया कि, राजनीति में पद से बड़ा व्यक्ति का चरित्र और नैतिकता होती है। महाराज जी के कहा, विनम्रता और नाम-जप ही युवा नेतृत्व को सफल बना सकते हैं। भक्ति और चरित्र की ताकत हर क्षेत्र में काम आती है। राजनीतिक जीवन में भी इसे जरूर अपनाएं।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष आर्यन मान के साथ उनका संवाद सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है। लोग महाराज श्री के जवाब को दिलचस्पी से सुनकर प्रतिक्रियांएं दे रहे हैं। दरअसल, आर्यन मान ऐसे परिवार से आते हैं, जिनका हरियाणा में शराब का बड़ा कारोबार है। जब एक युवा नेता, जिसका आधार ही ऐसे व्यवसाय से जुड़ा हो, संत के सामने खड़ा होता है, तो समाज की नजरें अक्सर विरोधाभासों पर टिकी होती हैं। महाराज श्री ने आर्यन मान से कहा, "आपका परिवार शराब व्यापारी है, पर आप खुद को इन व्यसनों से दूर रखें। राजनीति साफ-सुथरी छवि के साथ होनी चाहिए। चरित्र, धैर्य, अनुशासन और जरूरतमंदों की मदद ही आपका मूल उद्देश्य होना चाहिए।
प्रेमानंद जी ने साफ कहा कि, सार्वजनिक जीवन में केवल आचरण ही असली ताकत है। राजनीति अक्सर अहंकार और शक्ति प्रदर्शन बनकर रह जाती है। आप राजनीति को सेवा का माध्यम समझें। कैंपस में छात्रों के लिए एक मिसाल बनने के लिए नशा और अनैतिकता से कोसों दूर रहें। महाराज श्री ने कहा, यदि एक शराब कारोबारी का बेटा स्वयं नशा-मुक्त रहकर सात्विक जीवन जीता है, तो उसका असर समाज पर बहुत गहरा पड़ेगा।
महाराज जी ने राजनीति के तनाव और टकराव को दूर करने के लिए 'नाम-जप' और 'धैर्य' का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि, क्रोध बुद्धि का नाश कर देता है। वहीं, आध्यात्मिक अनुशासन व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी स्थिर (तटस्थ) रखता है। महाराज जी की ये नसीहत हर उस युवा के लिए है, जो करियर और चरित्र के बीच बैलेंस बनाना चाहता है। यह हमेशा ध्यान रखें, व्यवसाय चाहे जो भी हो, भक्ति और चरित्र ही व्यक्ति को ऊंचाइयों तक ले जाते हैं।