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सच्चा प्यार कैसे पहचानें? प्रेमानंद जी ने किया कनफ्यूजन दूर

Premamand Ji Maharaj on Lov: प्रेमानंद जी ने प्रेमियों के लिए बहुत खूबसूरत बात कही है। उन्होंने सच्चे प्यार और प्रेमी के गुणों को बहुत आसान शब्दों में समझाया है।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 11, 2026

Premanand ji mahraj latest pravachan

Premamand Ji Maharaj on Love: प्रेमानंद जी ने सच्चे प्यार और प्रेमी के गुणों को बहुत आसान शब्दों में समझाया है। (PC: BhajanMarg)

Premanand ji Maharaj Pravachan on True Love: हर कोई प्यार का दावा करता है, लेकिन असल प्यार का अहसास क्या होता है, इसे लेकर लोग अक्सर कनफ्यूज्ड रहते हैं। हाल ही, संत प्रेमानंद जी महाराजने इस कनफ्यूजन को दूर किया है। महाराज श्री कहते हैं, प्रेमी को अपने प्रिय के बिना संसार की हर चीज फीकी लगती है। उन्होंने जुदाई और मिलन की तड़प को बहुत ही सरल अंदाज में समझाया है।

सच्चे प्रेमी के लक्षण | Qualities of a True Lover

महाराज जी कहते हैं कि प्यार को शब्दों में बांधना मुश्किल है। जब आशिकी रूह तक पहुंच जाए, तो इंसान की पूरी दुनिया बदल जाती है। क्या आपने कभी ऐसा प्यार किया है, जहां सामने वाले को देखे बिना पल भर भी चैन न मिले? आशिकी ऐसी गजब की चीज है, जो इंसान का मोह पूरी दुनिया से छुड़ाकर बस एक ही शख्स पर टिका देती है।

नींद-चैन, भूख-प्यास भूला देता है प्यार | True lover's Condition

Premanand ji ने कहा, सच्चे प्रेमी के लिए वही गली सबसे खूबसूरत होती है, जहां उसका प्रिय रहता है। हालत ये होती है कि अगर प्रिय से मिलन न हो, तो न भूख लगती है, न प्यास। उसके बिना न नींद आती है, न जागना आसान होता है। रात भर बस उसी का ख्याल मन में रहता है। आशिकी में डूबने के बाद न श्रृंगार भी अच्छा नहीं लगता। न ही दोस्तों का साथ भाता है। मन बस इसी बात से खुश हो जाता है कि कोई आकर कह दे, 'मैंने उसे देखा है', 'वो तुम्हारे बारे में बात कर रहा था'। ये बातें ही दिल को बड़ा सुकून देती है। यादों की तड़प पर मरहम का काम करती है।

मिलन की खुशी और बिछड़ने का दुख एक साथ | True love Insecurities

जब प्यार बहुत गहरा हो जाता है, तब प्रेमी के बिना जीना मुश्किल लगने लगता है। उससे मिलते वक्त भी एक अजीब-सा डर हमेशा बना रहता है कि कहीं मेरा प्यारा मुझसे बिछड़ न जाए। यह डर ही प्यार की गहराई को बताता है। प्रेमी को खाना-पीना भी जहर जैसा लगता है, जब तक प्रिय साथ न हो। उसके बिना कोमल बिस्तर भी काटने को दौड़ता है। दुनिया की हर मीठी चीज कड़वी लगने लगती है।

आशिकी का असली मतलब | What is the Real Meaning of Love?

महाराज श्री ने प्यार को आशिकी शब्द से परिभाषित किया है। वे कहते हैं, आशिकी का मतलब सिर्फ साथ होना नहीं होता। आशिकी तो हर समय अपने प्यारे के ध्यान में खोए रहना है। उसकी मुस्कान, उसका बोलना और उसकी चितवन (नजर) ही प्रेमी के जीने का सहारा बन जाती है। 'हरी आशिक' वही है, जो सब-कुछ भूलकर बस एक की ही भक्ति और प्यार में रम जाए। सच तो यह है कि प्रेम से बड़ी दुनिया में कोई दूसरी चीज है ही नहीं।

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