जवाबः सही है, उत्तम है। बिजनेस का लॉस होना कोई खास लॉस नहीं है, लेकिन धर्म का लॉस होना सबसे बड़ा खास लॉस है। अगर हमारा जो धर्म है, चरित्र है, मतलब चरित्रहीनता और खूब बिजनेस, खूब रुपया! धन का लॉस होना कोई खास लॉस है क्या। खास लॉस है चरित्र का लॉस होना। कैरेक्टर इज लॉस, एवरीथिंग इज लॉस। तो आहार सही नहीं है, चरित्र सही नहीं है, तुम्हारा उद्देश्य सही नहीं है, तो हम तुम्हारा संग छोड़ देंगे। आपके संग का प्रभाव हमारे ऊपर भी पड़ेगा। हम भले ना पड़ने दें, पर चार लोगों की दृष्टि में रहेगा। तो हमारे चरित्र पर बात आएगी, तो बिजनेस को नहीं कहना सही है। बिजनेस इज लॉस, नथिंग इस लॉस। कैरेक्टर को, चरित्र को, धर्म को बचाइए। ये कंपनियों का छोड़ना कोई बड़ी बात नहीं। सबसे बड़ा बिजनेसमेन आपका (भगवान) है। इसी के साथ जितने भी बिजनेस हैं, ब्रह्मांड़ में इसी के पास है। सबसे बड़ा फैक्ट्री का मालिक यही है। सबका मालिक है वो और वो आपका फ्रेंड है, फिर किससे क्या लेना-देना। जहां इसके (ईश्वर के) विरुद्ध चल रहा हो, उसका त्याग कर देना चाहिए।