ज्योतिष के अनुसार शनि की साढ़ेसाती शुरू होते वक्त कुछ विशेष प्रकार की घटनाएं (signs of Shani Sade Sati) होने लगती हैं। ये घटनाएं संकेत करती हैं कि शनि की साढ़े साती शुरू हो रही है, ऐसा संकेत मिलने पर शनि के दुष्प्रभाव से राहत के लिए ये उपाय (Sade Sati remedy) करना चाहिए। हालांकि ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शनि की साढ़े साती के शुभ फल भी होते हैं। इस दौरान शनि की कृपा होने पर रंक भी राजा हो सकता है।

शनि की साढ़े साती के संकेतः शनि की साढ़े साती ढाई साल-ढाई साल के तीन हिस्सों में चलती है, पहले हिस्से में शनि व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान करता है, दूसरे हिस्से में आर्थिक, शारीरिक विश्वास आदि को क्षति पहुंचाता है, तीसरे हिस्से में शनि महाराज नुकसान की भरपाई करते हैं। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इसका मकसद सीख देना होता है कि किसी भी परिस्थिति से कैसे निपटें।
1. नशा करने का शौक आदत बनने लगे और व्यक्ति व्यसन की ओर अग्रसर हो तो समझें शनि की साढ़े साती का पड़ रहा है अशुभ प्रभाव।
2. अनावश्यक झूठ बोलने का स्वभाव अशुभ शनि का लक्षण माना जाता है।
3. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अशुभ शनि अनैतिक और अवैध संबंध की राह दिखाता है।
4. जमीन, प्लाट और मकान का विवाद अशुभ शनि का संकेत है।
5. शाकाहारी व्यक्ति का मांसाहार के प्रति झुकाव शनि की साढ़ेसाती के संकेत समझना चाहिए।
6. नौकरी व्यवसाय में व्यवधान, नौकरी छूटना, तबादला, पदोन्नति में बाधा, व्यवसाय में मंदी, घाटा, बेशुमार कर्ज, कर्ज अदायगी से चूकना आदि अशुभ शनि के लक्षण हैं।
7. पूर्वजों के मकान में जहां लंबे अरसे रह रहे हैं सुरक्षा की दृष्टि से चल संपत्ति रखते हैं और अंधेरा रहता है, वहां सूर्य का प्रकाश आने लगे तो इसे शनि की साढ़े साती के प्रभाव के रूप में समझा जा सकता है। इससे धन हानि की आशंका रहती है।
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शनि की साढ़े साती चल रही है तो करें यह उपायः ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि शनि की साढ़े साती शुरू हो गई है तो व्यक्ति को इस तरह के उपाय करने चाहिए ताकि शनि की पीड़ा कम हो।
1. शिव उपासनाः मान्यता है भगवान शिव शनिदेव के गुरु हैं, उनके गुरु की उपासना करने वाले शख्स से शनिदेव प्रसन्न रहते हैं। इसलिए शनि के दुष्प्रभाव से बचने के लिए नियमित भगवान शिव की पूजा अर्चना करनी चाहिए। नियमित रूप से शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।
2. पीपल वृक्ष को अर्घ्यः पीपल वृक्ष में देवताओं का वास माना जाता है, इसलिए पीपल वृक्ष को अर्घ्य देने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। अनुराधा नक्षत्र में शनिवार को अमावस्या हो तो यह तिथि विशेष हो जाती है। इस दिन विधिपूर्वक पीपल की पूजा अर्चना करनी चाहिए। शनि स्त्रोत का पाठ करना चाहिए।
3. हनुमानजी की पूजाः मान्यता है कि मंगलवार और शनिवार बजरंगबली की पूजा से भी शनि देव प्रसन्न होते हैं।
4. नाव की कील और घोड़े के नाल की अंगूठीः ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शनि दोष से राहत और उनकी कृपा पाने के लिए जातक को नाव के तले की कील या घोड़े की नाल की अंगूठी बनवाकर पहनना चाहिए।
5. ये दान भी महत्वपूर्णः शनि की साढ़े साती के दुष्प्रभाव से बचने के लिए शनि से संबंधित वस्तुएं लोहे के बर्तन, चिमटा, तवा , काला कपड़ा, सरसों का तेल, चमड़े का जूता, काला सुरमा, काला चना, काला तिल, उड़द आदि दान साधु को करने से भी शनि प्रकोप से राहत मिलती है।
6. महामृत्युंजय मंत्र का जापः शनि की साढ़े साती के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए, महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराना चाहिए और भगवान शिव का अभिषेक कराना चाहिए। इससे लाभ होता है।
7. बबूल का दातुनः शनि के हानिकारक प्रभाव को कम करने के लिए बबूल के दातुन से सुबह शाम दातुन करना चाहिए।
8. बीमारी की दशा में बड़ के पेड़ की जड़ में दूध चढ़ाकर गीली मिट्टी से तिलक लगाएं।
9. शुद्ध शहद घर के पूजा स्थान पर रखने से धन में वृद्धि होगी, इसे कत्तई घर के काम में इस्तेमाल न करें।
10. जन्मकुंडली में शनि चौथा या दसवां शनि अशुभ होने की दशा में सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से पूर्व दूध न पीएं।