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Shani Gochar 2027: मेष पर शुरू होगी साढ़ेसाती, जानें किन राशियों पर रहेगी ढैय्या

Shani Dhaiya 2027: शनि 2027 में राशि बदलेंगे, जिससे साढ़ेसाती और ढैय्या का पूरा गणित बदल जाएगा। जानें किन राशियों की मुश्किलें बढ़ेंगी और किसे मिलेगी राहत।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jun 16, 2026

Saturn Transit 2027, Shani Dhaiya 2027

Shani Gochar 2027: शनि राशि परिवर्तन 2027 के बाद किन राशियों पर शुरू होगी साढ़ेसाती? (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Saturn Transit 2027: शनि देव 3 जून 2027 से मेष राशि में प्रवेश करेंगे,, जिससे साढ़ेसाती (Sade Sati 2027) और ढैय्या का समीकरण बदल जाएगा। इस गोचर (Shani Gochar 2027) के बाद मेष राशि पर नई साढ़ेसाती शुरू हो सकती है, जबकि कुछ राशियों को राहत मिलने के संकेत हैं। ज्योतिष शास्त्र में कर्मफल दाता और न्याय के देवता माने जाने वाले शनि देव जब भी अपनी चाल बदलते हैं, तो देश-दुनिया से लेकर आम इंसान की जिंदगी में बड़े उलटफेर होते हैं।

वर्तमान में मीन राशि में विराजमान शनि देव साल 2027 में एक बार फिर महागोचर (Shani Gochar 2027) करने जा रहे हैं। शनि का यह राशि परिवर्तन कुछ राशियों के लिए सुनहरे दिन लेकर आने वाला है, तो वहीं कुछ राशियों के जीवन में कड़े इम्तिहान का समय शुरू होने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस गोचर के बाद साढ़ेसाती और ढैय्या (Shani Dhaiya 2027) का पूरा समीकरण ही बदल जाएगा।

क्या होती है शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या?

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, जब शनि देव किसी व्यक्ति की जन्म राशि से 12वें, पहले और दूसरे भाव से होकर गुजरते हैं, तो उस साढ़े सात साल की अवधि को साढ़ेसाती कहा जाता है। वहीं, जब शनि देव चंद्रमा से चौथे या आठवें भाव में गोचर करते हैं, तो उसे ढैय्या (Shani Dhaiya 2027) कहा जाता है।
विशेष नोट: शनि को क्रूर ग्रह माना जाता है, लेकिन वास्तव में वे अनुशासक हैं। वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए अच्छे कर्म करने वालों को शनि के गोचर से डरने की जरूरत नहीं होती।

शनि राशि परिवर्तन 2027 के बाद किन राशियों पर शुरू होगी साढ़ेसाती?

साल 2027 में होने वाले इस बड़े बदलाव के कारण अलग-अलग राशियों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है:

प्रभाव का प्रकारप्रभावित राशियांसंभावित असर और क्षेत्र
नई साढ़ेसाती की शुरुआतमेष राशिजीवन में नई जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, संघर्ष के साथ करियर में मैच्योरिटी आएगी।
साढ़ेसाती के विभिन्न चरणसिंह और धनु राशिमानसिक तनाव रह सकता है, लेकिन मेहनत का पूरा फल भी मिलेगा।
शनि की ढैय्या का सायाकर्क और वृश्चिक राशिसेहत, करियर और व्यक्तिगत जीवन में उतार-चढ़ाव। गुप्त शत्रुओं से सावधान रहना होगा।

पौराणिक महत्व और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

ज्योतिषीय ग्रंथों (जैसे बृहत पराशर होराशास्त्र) में उल्लेख है कि शनि देव सूर्य देव और छाया के पुत्र हैं। उनकी धीमी गति के कारण ही उन्हें 'शनैश्चर' कहा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो शनि सौरमंडल का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है, जिसे सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 29.5 वर्ष का समय लगता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यही कारण है कि यह एक राशि में लगभग ढाई साल तक टिकते हैं, जिससे इसका असर मानव जीवन पर सबसे गहरा और लंबे समय तक रहने वाला होता है।

शनि के प्रभाव को संतुलित करने के उपाय

यदि आपकी राशि पर भी शनि का साया शुरू होने जा रहा है, तो घबराने की बजाय इन आसान उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें:

कर्मों में शुचिता: किसी भी असहाय, बुजुर्ग, मजदूर या सफाईकर्मी का अपमान न करें। शनि देव कर्मों के देवता हैं, कमजोरों की मदद करने वालों पर वे हमेशा कृपालु रहते हैं।

दान-पुण्य: शनिवार के दिन काली उड़द, काला कपड़ा, तिल या सरसों के तेल का दान करें।

मंत्र साधना: प्रत्येक शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का जाप करें। हनुमान चालीसा का पाठ भी शनि दोषों से मुक्ति दिलाता है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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