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Sawan 2026: पातालेश्वर धाम में पीपल के पेड़ में माना जाता है देवी का वास, पाताल से निकले है महादेव

Temple Mystery: सावन में इस प्राचीन शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव स्वयं पाताल से प्रकट हुए थे। जानिए इस रहस्यमयी धाम की कहानी।
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भारत

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Akash Dewani

Aug 06, 2026

Sawan 2026 Pataleshwar Dham Temple Mystery mahadev emerged from patal

Sawan 2026: एमपी का ऐसा शिव मंदिर जिसके पीपल के पेड़ में देवी करती हैं वास (फोटो सोर्स- Patrika)

Sawan 2026:सावन में देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु दूर-दूर से आकर शिवालयों में भगवान शिव को बेलपत्र, दूध, जल और फूल अर्पित कर आशीर्वाद मांग रहे है। भोले बाबा से जुड़ा ऐसा ही एक प्राचीन धाम भी है जहां मान्यता है कि भगवान शिव स्वयं पाताल से प्रकट हुए थे। 259 साल पुराने इस रहस्यमयी मंदिर की कहानी आज भी श्रद्धालुओं को हैरान और आकर्षित करती है।

पाताल से निकले है महादेव, श्रद्धालुओं को लगती है भीड़

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के रेलवे स्टेशन के समीप स्थित पातालेश्वर धाम (Pataleshwar Dham) लोगों की आस्था और विश्वास का अटूट केन्द्र है। सावन एवं महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। दूर-दराज से हजारों की संख्या में भक्त भोले के दर्शन करने पहुंचते हैं। यह मंदिर अनेक अनूठे रहस्यों को समेटे हुए है। ऐसी मान्यता है कि घने जंगल के बीच पाताल से भगवान प्रकट हुए थे। इसलिए इसका नाम पातालेश्वर पड़ा। पातालेश्वर मंदिर मंदिर का इतिहास लगभग 259 वर्ष पुराना है। उस समय यहां पर बीहड़ जंगल हुआ करता था।

अहमदाबाद का नागा संत ने 259 साल पहले की थी स्थापना

पातालेश्वर धाम शहर के प्रमुख प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल है। लगभग ढाई सौ वर्ष पुराना यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केन्द्र बना हुआ है। सावन मास और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार गोस्वामी संप्रदाय के अहमदाबाद के नागा संत गंगागिरी बाबा का ढाई सौ वर्ष पहले संत गंगागिरी बाबा का यहां पर आगमन हुआ था। रात्रि में उनके स्वप्न में शिवजी ने दर्शन दिए और इस स्थल पर अपनी मौजूदगी का आभास कराया। अगले दिन उस स्थान पर खुदाई कराने पर भूरे रंग का शिवलिंग प्रकट हुआ।

पीपल में देवी का वास का होता है आभास

इस सिद्ध स्थल से जुड़ी एक और रोचक बात यह है कि यहां मौजूद पीपल के वृक्ष में देवी का वास माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां रात में देवी भ्रमण करती हैं। इसका आभास उनकी पायल के घुंघरूओं की मधुर ध्वनि से होता है।

तंत्र-मंत्र से है पुराना नाता

यह मंदिर एक मठ के रूप में जाना जाता है। कभी यहां नेपाल के पंडाओ और तांत्रिकों का जमावड़ा लगता था। ये लोग अंचल और प्रदेश में मौजूद अपने शिष्य और यजमानों की समस्या का निवारण के लिए यहां तांत्रिक क्रियाएं और अनुष्ठान करते थे।

पीढ़ी दर पीढ़ी हो रही देखरेख

मदिर की देखरेख पोडी दर पीढ़ी की जा रही है। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. तिलक गोस्वामी ने बताया कि मैं आठवीं पीढ़ी का हूं। उन्होने बताया कि अब तक नागा संप्रदाय से वार और गृहस्थ से चार लोग मंदिर की देखरेख कर चुके हैं।

कुंड के अंद्र विराजे हैं पातालेश्वर

पातालेश्वर मंदिर का इतिहास जितना पुराना है, यह उत्तना ही भव्य भी है। यहां पर भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग कुंड के अंद है। महाशिवरात्रि पर मेला लगता है. जिसमें लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं सावन माह में भी सुबह से लेकर देर रात तक भक्तों का तांता लगता है।