
Shani Sade Sati : कुंभ राशि पर शनि का प्रभाव (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)
Sade Sati Remedies: वैदिक ज्योतिष के अनुसार वर्तमान में कुंभ राशि के जातक शनि की साढ़ेसाती (Shani Sade Sati) के अंतिम चरण से गुजर रहे हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ शरद शर्मा और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साढ़ेसाती का दूसरा चरण सबसे ज्यादा कठिन माना जाता है, क्योंकि इस दौरान करियर, धन और रिश्तों में बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। हालांकि अब कुंभ राशि वालों के लिए राहत का समय शुरू हो चुका है और 3 जून 2027 को शनि की साढ़ेसाती पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साढ़ेसाती (Shani Sade Sati) को तीन प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है, जो जातक को जीवन के विभिन्न कड़वे-मीठे अनुभवों से रूबरू कराते हैं:
इस अवधि में जातक पर अचानक जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ता है, मानसिक तनाव की स्थिति बनती है और संचित धन का व्यय होता है।
इसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यह चरण करियर में रुकावटें, अपनों से वैचारिक मतभेद और कड़ा संघर्ष देता है, लेकिन साथ ही व्यक्ति को आत्मनिर्भर और धैर्यवान भी बनाता है।
यह वर्तमान समय है। इसमें पुराने संघर्षों का फल मिलना शुरू होता है। परिस्थितियां धीरे-धीरे नियंत्रण में आती हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।
कुंभ राशि के धन भाव में बैठे शनिदेव अपनी तीन विशेष दृष्टियों से जातक के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को प्रभावित कर रहे हैं:
यह भाव माता, भूमि, भवन और वाहन का होता है। वर्ष 2025 से इस भाव पर दृष्टि होने के कारण परिवार में किसी सदस्य के स्वास्थ्य पर भारी खर्च हुआ होगा या संपत्ति विवाद उपजा होगा। लेकिन अब यह चिंता दूर होगी और नया मकान या वाहन खरीदने के योग बनेंगे।
अष्टम भाव गुप्त रहस्यों और बाधाओं का है। जिन जातकों का पैसा लंबे समय से कहीं ब्लॉक था या डूबा हुआ था, वह वापस मिलने की उम्मीद जगेगी। ससुराल पक्ष से चल रहे मनमुटाव अब दूर होंगे।
व्यापार, नौकरी और राजनीतिक क्षेत्र में यह दृष्टि क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। विशेषकर आईटी सेक्टर, रियल एस्टेट, शेयर मार्केट, लोहा और औषधि (दवाइयों) के कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत माने जा रहे हैं।
ज्योतिषविदों के अनुसार, वर्ष 2026 के उत्तरार्ध में देवगुरु बृहस्पति भी अपनी मजबूत स्थिति में आ रहे हैं। चूंकि शनि इस समय गुरु के ही घर में विराजमान हैं, इसलिए शनि और गुरु का यह दुर्लभ संयोग कुंभ राशि के जातकों की रुकी हुई शादियों, अटके हुए विदेशी दौरों और व्यापारिक विस्तार के मार्ग को पूरी तरह खोल देगा।
कई बार जातक सोचते हैं कि एक ही राशि होने के बावजूद कुछ लोग साढ़ेसाती में आबाद हो जाते हैं और कुछ बर्बाद। इसका मुख्य कारण जातक की व्यक्तिगत कुंडली में शनि की स्थिति होती है। यदि कुंडली में शनि नीच का है, शत्रु राशि में है या चंद्रमा के साथ विष योग बना रहा है, तो तीसरे चरण में भी जातक को चोट-चपेट या मानसिक अवसाद का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, शनि के अस्तकाल (जब शनि सूर्य के निकट आकर प्रभावहीन या कमजोर हो जाते हैं) के दौरान परिणामों में थोड़ी अस्थिरता या मिश्रित फल देखने को मिलते हैं।
चूंकि शनि इस समय वाणी और कुटुंब के स्थान पर हैं, इसलिए जातकों को सबसे पहले अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना होगा। किसी को भी कड़वे वचन बोलने से बचें।धार्मिक मान्यता के अनुसार ये उपाय आपके कष्टों को दूर करने में मदद कर सकते हैं।
महामंत्र का जाप: कलयुग के विधान के अनुसार शनिदेव के तांत्रिक मंत्र ॐ प्राम प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः का यथाशक्ति (19,000 या 92,000) जप करें।
चौमुखा दीपक: प्रत्येक शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का एक चौमुखा (चार बत्तियों वाला) दीपक जलाएं और वृक्ष की चार परिक्रमा करें।
हनुमान साधना: शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से शुरू करके, हनुमान जी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर 'हनुमान चालीसा' के 108 पाठ का संकल्प लें। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार राहत मिल सकती है।
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।
Published on:
15 Jun 2026 02:08 pm
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