धर्म

Sharad Purnima 2026 : रात भर जागने मात्र से मिल सकती है अथाह धन संपत्ति, लक्ष्मीजी कर सकती हैं कृपा

Sharad Purnima 2026 : शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं, लक्ष्मीजी का आशीर्वाद प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर
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Oct 20, 2026
शरद पूर्णिमा पर मिलता है मां लक्ष्मी का आशीर्वाद
शरद पूर्णिमा पर मिलता है मां लक्ष्मी का आशीर्वाद laxmiji- AI Grok

Sharad Purnima 2026 : सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का एक खास स्थान है। प्रत्येक मास का नामकरण पूर्णिमा से ही होता है। धर्म के लिहाज से वैसे तो इस तिथि का अपना अलग ही महत्व है लेकिन कुछ पूर्णिमा बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती हैं। इनमें अश्विन माह की पूर्णिमा भी शामिल है जिसे सर्वोत्तम पूर्णिमा माना गया है। इसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। पश्चिम बंगाल में इसे कोजागर पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को जागरण करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और उनके आशीर्वाद से धन संपत्ति प्राप्त होती है। शरद पूर्णिमा पर रात भर चांदनी रात में खीर रखने और इसे दूसरे दिन सुबह भोग लगाने के बाद खाने की परंपरा है। यह आरोग्य प्रदान करती है।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करना चाहिए। शाम को चंद्रोदय के समय देशी घी के दीप जलाना चाहिए। भजन कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करना चाहिए। दूसरे दिन सूर्योदय के समय माता लक्ष्मी की पूजा कर प्रसाद के रूप में खीर का सेवन करना चाहिए।

शरदा पूर्णिमा के प्रसाद के लिए शाम को ही दूध की खीर बना लें और रात को इसे खुले आसमान तले चांद की चांदनी में रख दें। सुबह उठकर माता लक्ष्मी को खीर का यह भोग अर्पित करें। बाद में सभी परिजन खीर का प्रसाद ग्रहण कर लें।

अमृत के समान हो जाती खीर

माना जाता है कि शरद पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से संपूर्ण होता है और अपनी किरणों से रात भर अमृत की वर्षा करता है। यही कारण है कि रात्रि में खीर को खुले आसमान में रखते हैं। इससे खीर अमृत के समान हो जाती है। यह औषधि का काम भी करती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखी खीर में कई रोगों को ठीक करने के गुण आ जाते हैं।

रास पूर्णिमा भी

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के मुताबिक शरद पूर्णिमा का पर्व विशेष रूप से मां लक्ष्मी की कृपा से जुड़ा है। प्रसाद के रूप में खीर खाने के साथ ही शरद पूर्णिमा का धन संपत्ति के लिए भी विशेष महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार माता लक्ष्मी इस रात को धरती पर भ्रमण करती हैं। रात में जो जागता मिल जाता है उस पर अपनी कृपा बरसाती हैं। यह भी कहा गया है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था। इसलिये शरद व कोजागर पूर्णिमा के साथ ही इसे रास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

Updated on:
20 Oct 2026 03:48 pm
Published on:
20 Oct 2026 03:48 pm