
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक रत्नों को बहुत प्रभावशाली माना जाता है। हर ग्रह से संबंधित कोई न कोई रत्न होता है। कुंडली के नवग्रहों में से एक केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। वहीं केतु ग्रह का रत्न लहसुनिया माना गया है। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक लहसुनिया रत्न धारण करने से यह जीवन में सफलता के मार्ग में आने वाली रुकावटों को दूर करता है। यह रत्न पीले, काले, सफेद और हरे रंग में उपलब्ध होता है और इस पर सफेद धारियां होती हैं। तो आइए जानते हैं लहसुनिया रत्न धारण करने का तरीका और किन राशि वालों के लिए यह लाभकारी माना गया है...
लहसुनिया रत्न धारण करने के फायदे
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु ग्रह अशुभ प्रभाव में हो तो उसे लहसुनिया रत्न धारण करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि लहसुनिया रत्न केतु के दुष्प्रभाव को दूर करके कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति के जीवन में सुखों में वृद्धि करता है।
लहसुनिया रत्न धारण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही यह स्मरण शक्ति को बढ़ाने में भी प्रभावकारी माना गया है। वहीं इस रत्न को पहनने से व्यापार में आने वाली बाधाओं और आर्थिक तंगी से छुटकारा मिल सकता है।
लहसुनिया रत्न किस राशि वालों को पहनना चाहिए
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक वृष, मिथुन, तुला, मकर और कुंभ राशि के लोगों के लिए लहसुनिया रत्न धारण करना शुभ माना गया है।
कैसे धारण करें लहसुनिया रत्न
रत्न शास्त्र के मुताबिक लहसुनिया रत्न को कुंडली में केतु के अशुभ स्थिति में होने पर धारण किया जाता है। माना जाता है कि इस रत्न के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए इसके सही वजन के अनुसार ही धारण करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सवा चार रत्ती से कम वजन वाला लहसुनिया रत्न पहनना शुभ नहीं होता। इस रत्न को धारण करने से पहले 'ॐ कें केतवे नमः' मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए।
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