धर्म

विजयादशमी पर्व : 30 फीट रावण का किया दहन

दशहरा उत्सव समिति के तत्वावधान में सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान में 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम का राजतिलक भी हुआ। श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर झांकी का स्वागत किया।
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दशहरा उत्सव समिति के तत्वावधान में सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान में 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम का राजतिलक भी हुआ। श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर झांकी का स्वागत किया।

बालोद जिला मुख्यालय में विजयादशमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राज दशहरा उत्सव समिति के तत्वावधान में सरदार वल्लभभाई पटेल मैदान में 30 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। कार्यक्रम में भगवान श्रीराम का राजतिलक भी हुआ। उत्सव देखने के लिए शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों लोग पहुंचे।

निकाली राम-रावण की झांकी

शुरुआत मोखला मांझी मंदिर से भगवान श्रीराम और रावण की झांकी के साथ हुई। शहर के प्रमुख मार्गोंे से गुजरती झांकी सरदार पटेल मैदान पहुंची। इसमें श्रीराम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान के स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहे। जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर झांकी का स्वागत किया।

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अखाड़ा और मलखंब ने बढ़ाया रोमांच

रावण दहन से पहले अखाड़ा दलों ने मलखम, लाठी और तलवारबाजी के करतब दिखाए। पहलवानों ने पिरामिड बनाकर शारीरिक कौशल और संतुलन का प्रदर्शन किया। करतबों पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह बढ़ाया।

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45 मिनट तक हुई आतिशबाजी

रावण दहन से पहले और बाद में 45 मिनट तक आतिशबाजी की गई। रंग-बिरंगी रोशनी से आसमान जगमगा उठा। सुरक्षा के लिए रावण के पुतले से 30 फीट दूर बैरिकेडिंग की गई थी। मौके पर दमकल वाहन भी तैनात रहा।

जय श्रीराम के नारों से गूंजा मैदान

आतिशबाजी के बाद भगवान श्रीराम ने रावण के पुतले का दहन किया। पुतले में आग लगते ही मैदान जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। इसके बाद श्रीराम का राजतिलक किया गया।

प्रशासन ने संभाली व्यवस्था

नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी, पालिका की टीम और पुलिस बल ने व्यवस्थाएं संभालीं। सफाई, पेयजल, प्रकाश, यातायात और भीड़ नियंत्रण के इंतजाम किए गए। पुलिस की मुस्तैदी से कार्यक्रम शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। दशहरा उत्सव के माध्यम से लोगों को असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। आयोजन में अखाड़ा, मलखम और आतिशबाजी प्रमुख आकर्षण रहे।