धर्म

सूरज ढलने से पहले जरूर कर लें ये उपाय, शनिदेव की कृपा से आ जाएंगे अच्छे दिन

शनि देव कर्म के आधार पर फल देते हैं।

2 min read
Jan 11, 2020
Shanidev

शनिदेव कर्म के देवता हैं। माना जाता है कि शनि देव कर्म के आधार पर फल देते हैं। यही कारण है कि ग्रहों की चाल में शनि को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। शनिदेव को मनाने के लिए कुछ उपाय करके कुंडली के उन दोषों को दूर कर किया जा सकता है। आइये जानते हैं उन उपायों के बारे में..


सबसे पहले शनिदेव की कृपा पाने के लिए अपने माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करना चाहिए। यदि आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो मन ही मन हर दिन प्रणाम करें। ऐसा करने से शनिदेव आप पर प्रसन्न रहेंगे।


अगर शनि की ढैया या साढ़ेसाती चल रही है तो शमी के वृक्ष की जड़ को काले कपड़े में पिरोकर शनिवार की शाम दाहिने हाथ में बांध लें और ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: मंत्र का तीन माला जप करें। ऐसा करने से शनि की ढैया या साढ़ेसाती का प्रकोप कम होगा।


शनि से जुड़े दोष दूर करने के लिए शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करें। माना जाता है कि ऐसा करने से शनि के प्रकोप और सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।


बजरंग बली की साधना से भी शनि से जुड़ी दिक्कतें दूर हो जाती हैं। कुंडली में शनि से जुड़े दोषों को दूर करने के लिए प्रतिदिन सुंदरकांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंदिर में जाकर अपनी क्षमता के अनुसार कुछ मीठा प्रसाद चढ़ाएं।


शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए 'सूर्य पुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिव प्रिय:। मंदाचाराह प्रसन्नात्मा पीड़ां दहतु में शनि:।।' मंत्र का जप करें।


शमी का वृक्ष घर में लगाएं और नियमित रूप से उसकी पूजा करें। इससे आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा और शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी।


जल में गुड़ या शक्कर मिलाकर शनिवार के दिन पीपल को जल देने और तेल का दीपक जलाने से भी शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है।


शनिवार को शनिदेव को नीले रंग का अपराजिता फूल चढ़ाने और काले रंग की बाती और तिल के तेल से दीप जलाने से शनि महाराज की कृपा प्राप्त होती है।

Published on:
11 Jan 2020 11:25 am
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