
Pushya : वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र का बहुत महत्व है। इसे सबसे शुभ माना गया है। पुष्य नक्षत्र में जहां सोना-चांदी, वाहन, जमीन, मकान आदि खरीदना शुभ माना गया है वहीं इस अवधि में पूजा पाठ करना भी बहुत फलदायी साबित होता है। पुष्य ऩक्षत्र में की गई पूजा का त्वरित परिणाम मिलता है। अगले माह यानि नवंबर की पहली तारीख को ही यह नक्षत्र पड़ रहा है। पुष्य नक्षत्र के साथ बन रहे शुभ योग कई जातकों को कार, बंगला जैसी स्थायी संपत्ति दिला सकते हैं।
धर्माचार्य बताते हैं कि ऋग्वेद में पुष्य नक्षत्र का महत्व बताया गया है। इसे आनंदकर्ता, मंगलकर्ता और वृद्धिकर्ता कहा गया है। ज्योतिषिय मान्यताओं के अनुसार, पुष्य नक्षत्र में गंगाजल व शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इस दिन शिव पूजा को अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई के अनुसार पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं जोकि सोना के कारक माने जाते हैं और नक्षत्र स्वामी शनि हैं जोकि स्थायित्व प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस दिन सोना खरीदना शुभ और स्थायी होता है। खासतौर पर शनि पुष्य या गुरु पुष्य नक्षत्र में सोना, वाहन, मकान या जमीन जरूर खरीदना चाहिए। ये खरीदी चिरस्थायी साबित होती हैं। पुष्य नक्षत्र पर गुरु और शनि के अलावा चंद्रमा का भी प्रभाव होता है इसलिए चांदी के जेवर भी खरीदे जा सकते हैं।
सप्ताह के अलग-अलग वारों के साथ मिलकर पुष्य नक्षत्र अलग अलग विशेष योग बनाता है। सोमवार को पुष्य नक्षत्र आने पर सोम पुष्य, मंगलवार को आने पर भौम पुष्य, बुधवार को बुध पुष्य, गुरुवार को आने पर गुरु पुष्य, शुक्रवार को आने पर शुक्र पुष्य, शनिवार को आने पर शनि पुष्य और रविवार को आने पर रवि पुष्य योग बनता है। इस बार रवि पुष्य नक्षत्र योग बन रहा है। इस योग में सोना, चांदी या स्थाई संपत्ति खरीदना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र दरअसल शनि की कृपा दिलाने वाला नक्षत्र है। इस दिन शनि पूजन अवश्य करना चाहिए। गुरु और शनि के प्रभाव के कारण पुष्य नक्षत्र में पूजा पाठ का त्वरित व स्थायी परिणाम मिलता है। खासतौर पर गुरु मंत्र व शनि मंत्र के जाप करना चाहिए।
1 नवंबर, रविवार को सुबह 5:39 बजे से पुष्य नक्षत्र लग जाएगा। यह 2 नवंबर यानि सोमवार को सुबह 4:30 बजे तक रहेगा।