
Sankashti Chaturthi : हर माह में दो बार चतुर्थी तिथि आती है। इस दिन व्रत रखकर गणेशजी का पूजन किया जाता है। माह के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि संकष्टी चतुर्थी कहलाती है जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर विनायक चतुर्थी व्रत करते हैं। दोनों ही गणेश चतुर्थी व्रत का महत्व है। संकष्टी चतुर्थी व्रत हमें खासतौर पर हर प्रकार के संकटों से बचाता है। गणेशजी की प्रसन्नता व आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए ये व्रत किया जाता है। माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से गणेशजी हर तरह की परेशानियां दूर कर देते हैं। कोई आसन्न संकट हो तो गणेशजी की कृपा से दूर हो जाता है। सीताजी की तलाश में निकलने के पूर्व हनुमानजी ने भी यह व्रत रखा था। इसके प्रभाव से गणेशजी की कृपा से लक्ष्य भी प्राप्त किया। 29 अक्टूबर को कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन गणेश चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गणेशजी न केवल बुद्धिविधाता हैं बल्कि संकटनाशक भी माने जाते हैं। संकष्टी चतुर्थी व्रत इतना प्रभावशाली माना जाता है कि शनि की साढे साती से पीड़ित लोगों को भी राहत देता है। इस व्रत के प्रभाव से वे प्राय: इस अवधि में आनेवाले संकटों से बचे रहते है।
ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि गणेश चतुर्थी या संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन दोपहर में गणेश पूजा का विधान है। गणेशजी को दूर्वा जरूर अर्पित करें। चतुर्थी व्रत करनेवालों को उदय होते चंद्रमा, श्रीगणेश और चतुर्थी माता को अर्घ्य देना चाहिए।
धर्माचार्य नरेंद्र नागर बताते हैं कि हनुमानजी भी गणेशजी की पूजा करते थे। सीताजी को खोजने के लिए निकलने से पहले उन्होंने गणेश चतुर्थी व्रत रखकर गणेशजी की पूजा की थी। गणेशजी की कृपा से हनुमानजी अपने बल के साथ बुद्धि का प्रयोग करते हुए सभी संकटों से पार पाते हुए सीताजी को खोजने में सफल हो सके थे।
29 अक्टूबर को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर करवा चौथ का व्रत भी मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को सुबह 1:06 बजे प्रारंभ होगी और 29 अक्टूबर को रात 10:09 बजे तक रहेगी। इस दिन गणेश पूजा का सबसे शुभ समय सुबह 6:31 बजे से 7:54 बजे तक का है।